AIMIM नेता ने आतंकवादी साजिद मीर के मामले में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत ने कई बार पुख्ता सबूत दिए, मगर पाकिस्तान ने लंबे समय तक यह कहकर टालमटोल किया कि मीर मर चुका है। FATF के दबाव के बाद पाकिस्तान ने आखिरकार माना कि मीर जीवित है, और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उसे सज़ा दी गई। यह दिखाता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेता। ओवैसी ने पीएम नरेंद्र मोदी की उस पाकिस्तान यात्रा की भी आलोचना दोहराई, जब वे बिना निमंत्रण इस्लामाबाद पहुंचे थे। उन्होंने कहा, “मैं पहला व्यक्ति था जिसने इस यात्रा पर सवाल उठाए थे। पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी ISI को भारत बुलाना और सबूत सौंपना समझ से परे था। बावजूद इसके, पाकिस्तान ने कोई रचनात्मक सहयोग नहीं किया।”
रियाद में दिए गए भाषण में ओवैसी ने दो टूक कहा कि पाकिस्तान से बात करने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि वहां निर्णय लेने वाली कोई स्थायी अथॉरिटी ही नहीं है। “आज अगर सवाल उठता है कि भारत पाकिस्तान से बातचीत क्यों नहीं करता, तो जवाब यह है कि पाकिस्तान में बात किससे की जाए? वहां सरकारें खुद तय नहीं कर पातीं कि अंतिम निर्णय किसका होगा।” ओवैसी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल करने की मांग की। “यही एकमात्र रास्ता है जिससे पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों की फंडिंग पर रोक लगाई जा सकती है। जब अमेरिका द्वारा घोषित एक आतंकी पाकिस्तान के फील्ड मार्शल के साथ बैठा नजर आए, तो और क्या सबूत चाहिए कि पाकिस्तान आतंक का संरक्षक है?”
पाकिस्तान की उस बयानबाज़ी पर भी ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें वह खुद को मुस्लिम देशों का रहनुमा बताता है। उन्होंने कहा, “भारत में 240 मिलियन मुसलमान रहते हैं और वे गर्व से भारतीय हैं। पाकिस्तान बार-बार यह झूठ फैला रहा है कि भारत मुसलमानों के खिलाफ है, जबकि सच यह है कि वही देश आतंक को पालकर पूरे दक्षिण एशिया की शांति को खतरे में डाल रहा है।” ओवैसी ने कहा, “अगर पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन करना बंद कर दे, तो दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास की नई राह खुल सकती है। दुर्भाग्यवश, आज भी पाकिस्तान आतंक के रास्ते पर चल रहा है और भारत को अस्थिर करने की साजिशें रच रहा है।”





