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विधानसभा टिकट के लिए 50 लाख, बंगले की भी मांग! यूपी कांग्रेस प्रभारी पर वसूली के गंभीर आरोप

यूपी कांग्रेस में टिकट के नाम पर वसूली के आरोप

विधानसभा टिकट के लिए 50 लाख, बंगले की भी मांग! यूपी कांग्रेस प्रभारी पर वसूली के गंभीर आरोप
फोटो: Rajendra Pal Gautam

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी हैं। चुनाव नजदीक आ रहा है, तो राजनीतिक हलचल भी तेज होने लगी है। पार्टियां अपना संगठन मजबूत करने और उम्मीदवारों की तलाश में जुटी हैं। इसी बीच कांग्रेस से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पार्टी के भीतर टिकट और पदों के बंटवारे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से जुड़ा है। उन पर विधानसभा का टिकट दिलाने के बदले 50 लाख रुपये लेने, टिकट मिलने पर 2 करोड़ रुपये की और डील करने और एक बंगला अपने नाम कराने तक के आरोप लगाए गए हैं।

ये आरोप कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी को भेजे गए एक कथित ई-मेल में लगाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि राजेंद्र पाल गौतम के कार्यालय से जुड़े लोगों और उनके निजी संगठन 'मिशन जय भीम' के कुछ पदाधिकारियों के जरिए टिकट, पार्टी में पद और उनसे मुलाकात कराने के नाम पर पैसे मांगे जा रहे थे। ई-मेल में कई लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और UPI ID का भी जिक्र किया गया है।

कौन हैं राजेंद्र पाल गौतम?

राजेंद्र पाल गौतम दिल्ली की सीमापुरी विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं और अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री भी रहे हैं। 6 सितंबर 2024 को उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। वह कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। 26 जून 2026 को कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया। उन्होंने अविनाश पांडे की जगह यह जिम्मेदारी संभाली।

किसने की शिकायत, किन लोगों के नाम आए सामने?

कथित ई-मेल 29 अक्टूबर 2026 को भेजा गया बताया गया है। इसमें शिकायतकर्ता ने अपना नाम 'राव साहब' बताया है। उसने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायत में विनय गौतम और सोनू गौतम नाम के दो लोगों का जिक्र है। आरोप है कि दोनों राजेंद्र पाल गौतम के रिश्तेदार और निजी सहायक (PA) हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पिछले तीन महीनों से ये लोग उत्तर प्रदेश में अलग-अलग लोगों से संपर्क कर रहे थे। उन्हें राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात कराने, कांग्रेस में शामिल कराने, पार्टी में पद दिलाने और विधानसभा का टिकट दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बदले पैसे मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने मामले की पड़ताल के लिए एक व्यक्ति को डमी उम्मीदवार बनाकर टिकट मांगने भेजा था। आरोप है कि उससे टिकट दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये मांगे गए। ई-मेल में कुछ मोबाइल नंबर और UPI ID भी दिए गए हैं, जिनके जरिए कथित लेनदेन होने की बात कही गई है।

उतरौला सीट के लिए 50 लाख, टिकट मिलने पर 2 करोड़ की मांग?

ई-मेल में सबसे गंभीर आरोप उतरौला विधानसभा सीट को लेकर है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, हसीब खान नाम के व्यक्ति से इस सीट का टिकट दिलाने के लिए 50 लाख रुपये लिए गए। इसके अलावा टिकट मिलने पर 2 करोड़ रुपये और देने की कथित डील हुई थी। इस मामले में मिशन जय भीम से जुड़े अजीत आर्य और मेजर शेखर के शामिल होने का आरोप भी लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हसीब खान ने 15 अक्टूबर को राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात की थी। इसके बाद 2 नवंबर को उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा से भी मुलाकात की।

अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति से पैसे मांगने का नहीं है, बल्कि कांग्रेस में टिकट बांटने के तरीके पर भी उठेंगे।

बीकेटी सीट के बदले बंगला मांगने का आरोप

शिकायत में लखनऊ की बीकेटी विधानसभा सीट को लेकर भी एक गंभीर दावा किया गया है। इसमें अभिषेक यादव नाम के व्यक्ति का जिक्र है। आरोप है कि इस सीट का टिकट दिलाने के बदले गोमती नगर स्थित उनका बंगला राजेंद्र पाल गौतम के नाम कराने की डील हुई थी। यानी शिकायतकर्ता का दावा केवल पैसे लेने तक सीमित नहीं है। इसमें टिकट के बदले संपत्ति लेने की बात भी कही गई है। हालांकि, बंगले के मालिकाना हक या उसे ट्रांसफर कराने से जुड़े दस्तावेज सामने नहीं आए हैं।

मिशन जय भीम के पदाधिकारियों के नाम भी शामिल

इस मामले में राजेंद्र पाल गौतम के निजी संगठन 'मिशन जय भीम' का भी जिक्र है। ई-मेल और उससे जुड़ी रिपोर्टों में बीपी निगम, अजीत आर्य, मेजर शेखर और कनिष्क सिंह के नाम सामने आए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संगठन से जुड़े कुछ लोग इस कथित वसूली में शामिल थे। इसके अलावा विनय गौतम और सोनू गौतम पर पार्टी में पद दिलाने और नेताओं से मुलाकात कराने के नाम पर पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं।

बदायूं में जिलाध्यक्ष पद के लिए 6 लाख लेने का आरोप

कथित ई-मेल में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान का भी जिक्र है। शिकायतकर्ता का दावा है कि बदायूं में जिलाध्यक्ष का पद दिलाने के लिए 6 लाख रुपये लिए गए। इस मामले में FIR दर्ज होने की बात भी कही गई है। इसके अलावा गौतम के बंगले में निर्माण कार्य कराने के बदले पार्टी में पद दिलाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, बदायूं की FIR का पूरा विवरण और उसमें नामजद लोगों की जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

टिकट के नाम पर ठगी से सावधान रहने की अपील खुद गौतम ने की थी

इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि राजेंद्र पाल गौतम ने 20 अक्टूबर को खुद एक वीडियो जारी कर कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों को टिकट के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग खुद को AICC का प्रतिनिधि बताकर टिकट दिलाने के नाम पर 76 हजार रुपये मांग रहे हैं। गौतम ने साफ कहा था कि कांग्रेस टिकट देने के नाम पर किसी से पैसे नहीं मांगती। अब उनके कार्यालय से जुड़े लोगों और संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर ही इसी तरह के आरोप लगने से मामला और गंभीर हो गया है।

राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान क्या करेंगे?

राजेंद्र पाल गौतम को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी पर टिकट और पार्टी में पद दिलाने के बदले पैसे लेने के आरोप कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल हैं। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से जांच की मांग की है। अब सवाल है कि क्या पार्टी ई-मेल में दिए गए मोबाइल नंबरों, UPI ID और कथित लेनदेन की जांच कराएगी? क्या राजेंद्र पाल गौतम से जवाब मांगा जाएगा? और क्या शिकायत में नामित लोगों की भूमिका की पड़ताल होगी? फिलहाल ये सभी आरोप एक कथित ई-मेल शिकायत पर आधारित हैं। इनमें बताए गए लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि और जांच का नतीजा सामने नहीं आया है। राजेंद्र पाल गौतम का इन आरोपों पर जवाब भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। लेकिन चुनाव से पहले सामने आई इस शिकायत ने कांग्रेस के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पार्टी में टिकट और पद देने का काम पैसे के दम पर हो रहा था?