प्रधानमंत्री ने कहा कि 50 साल पहले सिक्किम ने भारत के साथ जुड़कर एक लोकतांत्रिक भविष्य चुना था। उन्होंने कहा, “सिक्किम के लोगों की भावना केवल भौगोलिक नहीं थी, बल्कि भारत की आत्मा से जुड़ने की थी। देश ने आपके भरोसे को देखा है और उसी का परिणाम है राज्य की निरंतर प्रगति।” पीएम मोदी ने सिक्किम को प्रकृति संग प्रगति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राज्य 100% ऑर्गेनिक खेती वाला प्रदेश बना है, जैवविविधता का संरक्षण हुआ है और सांस्कृतिक धरोहरों को भी सहेजा गया है। उन्होंने कहा, “आज के कार्यक्रम में विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ, जो सिक्किम की भविष्य यात्रा को रेखांकित करते हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह स्वयं इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनना चाहते थे। उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली से बागडोगरा तक तो पहुंच गया था, लेकिन मौसम ने मुझे सिक्किम की धरती तक पहुंचने से रोक दिया। हालांकि, मैं मन से आपके साथ हूं। पीएम मोदी ने उत्तर-पूर्वी भारत में विकास की गति को रेखांकित करते हुए कहा, “जहां कभी दिल्ली से दूरी विकास में बाधा थी, अब वहीं से प्रगति के नए द्वार खुल रहे हैं। इस परिवर्तन का बड़ा कारण है—बेहतर कनेक्टिविटी।”
प्रधानमंत्री ने सिक्किम की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर की सराहना की। “यहां झीलें, झरने, अध्यात्म और विश्व प्रसिद्ध कंचनजंगा नेशनल पार्क जैसे धरोहर स्थल हैं। सिक्किम की इस विरासत पर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को गर्व है।” उन्होंने स्वर्ण जयंती के अवसर पर जारी किए गए प्रमुख प्रोजेक्ट्स—नया स्काईवॉक, स्वर्ण जयंती परियोजनाएं और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य की नई उड़ान के प्रतीक हैं।





