कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमने-सामने खुली बहस की चुनौती देकर सियासी बहस तेज कर दी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पूछा कि क्या प्रधानमंत्री उनके साथ देश के सामने बहस करने को तैयार हैं। स्क्रिप्ट के मुताबिक, इस सवाल पर हुए ऑनलाइन सर्वे में 2.56 लाख लोगों ने हिस्सा लिया और 73 प्रतिशत लोगों ने बहस के पक्ष में राय दी। विवाद की शुरुआत 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर में नरेंद्र मोदी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने विरोधियों पर “विदेशी ताकतों” से संबंध रखने और देश को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी ने किन मुद्दों पर बहस की चुनौती दी? राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से कहा कि वह किसी भी मंच और समय पर बहस के लिए तैयार हैं। बाद में उन्होंने बहस के संभावित मुद्दे भी गिनाए। इनमें भारत का वित्तीय ढांचा, अमेरिका के साथ ट्रेड डील, अडानी से जुड़ा मामला और जेफ्री एपस्टीन से संबंधित सवाल शामिल हैं। राहुल गांधी का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री विपक्ष पर विदेशी ताकतों से संबंध होने का आरोप लगाते हैं तो इन आरोपों पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए।
वित्तीय व्यवस्था और विदेशी निवेश पर सवाल राहुल गांधी ने वित्तीय व्यवस्था को भी बहस का अहम मुद्दा बनाया है। स्क्रिप्ट में शेयर बाजार से जुड़े टैक्स और विदेशी निवेश के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि हाल के वर्षों में विदेशी निवेश में गिरावट आई है। इसमें नेट एफडीआई के 2020-21 के करीब 44 अरब डॉलर से घटकर 2024-25 में लगभग 0.96 अरब डॉलर रहने का उल्लेख है। स्क्रिप्ट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निकासी का भी जिक्र किया गया है।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील और अडानी मामला राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को लेकर भी सवाल उठाए हैं। स्क्रिप्ट के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ बढ़ाया था और बाद में प्रस्तावित समझौते के तहत इसे 18 प्रतिशत तक लाने की बात सामने आई। राहुल गांधी ने सवाल किया कि यह समझौता इतनी जल्दी क्यों हुआ और इसमें कैबिनेट की भूमिका क्या रही।
इसके अलावा अडानी मामले को लेकर भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है। स्क्रिप्ट में अमेरिकी एजेंसियों की जांच, बाद की कानूनी प्रक्रिया और अडानी समूह से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है। साथ ही जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सवालों पर भी राजनीतिक विवाद का जिक्र है। हालांकि इन मुद्दों पर लगाए गए आरोपों और उनके कानूनी निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
क्या होगी मोदी-राहुल गांधी की आमने-सामने बहस? राहुल गांधी की चुनौती के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बहस को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक स्वीकृति सामने नहीं आई है, ऐसा स्क्रिप्ट में दावा किया गया है। राजनीतिक तौर पर यह बहस आसान नहीं होगी, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
राहुल गांधी का कहना है कि प्रधानमंत्री को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए। वहीं, इस पूरे विवाद का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या प्रधानमंत्री या उनकी सरकार इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देती है। फिलहाल बहस की संभावना स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे जुड़े राजनीतिक सवाल चर्चा में बने हुए हैं।





