स्वतंत्र पत्रकारिता और मुख्यधारा के मीडिया के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। हाल ही में यूट्यूब चैनल 'पॉलिटिक्स बीजेपी न्यूज' की निवेदिता शांडिल्य ने अपने नए शो 'टीआरपी फोबिया' (TR Phobia) के जरिए गोदी मीडिया के रवैये, कवरेज के तरीकों और टीवी एंकरों के दलबदल पर तीखा हमला बोला है।
विपक्ष की रैली और 'अराजकता' का नैरेटिव निवेदिता शांडिल्य ने एबीपी न्यूज की वरिष्ठ एंकर चित्रा त्रिपाठी के शो की टाइमिंग और उसके शीर्षक पर सवाल उठाए। दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ रैली' से पहले ही टीवी चैनलों पर अराजकता फैलने की आशंका जताई जाने लगी थी।
चैनलों पर "1 नवंबर डेट, अराजकता सेट?" जैसे शो चलाए गए। तंज कसते हुए कहा गया कि पत्रकार सवालिया निशान (Question Mark) लगाकर कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं, जबकि असली अराजकता एकतरफा रिपोर्टिंग, छात्रों या किसानों को निशाना बनाना और चाटुकारिता करना है।
शांतिपूर्ण समापन और नुकसान का नया एंगल रैली विशाल भीड़ के साथ शांतिपूर्वक संपन्न हुई। इसके बाद गोदी मीडिया ने अपने सुर बदलकर नया नैरेटिव तलाशना शुरू कर दिया। रैली के साइड इफेक्ट्स पर चर्चा करते हुए व्यापारियों के नुकसान का मुद्दा उठाया गया। हालांकि, जमीनी सच्चाई यह थी कि रविवार को दिल्ली के प्रमुख थोक बाजार आधिकारिक रूप से बंद रहते हैं। इसके बावजूद टीआरपी और प्रोपेगैंडा के लिए झूठे दावों और रामलीला मैदान की कुर्सियों को खाली बताने जैसे प्रयास किए गए।
एंकरों की 'म्यूजिकल चेयर' और टीआरपी का खेल रिपोर्ट में टीवी न्यूज इंडस्ट्री में चल रहे एंकरों के दलबदल पर भी तंज कसा गया। चित्रा त्रिपाठी, रुबिका लियाकत, अमीष देवगन जैसे नामी एंकरों का एक चैनल से दूसरे चैनल में जाने की तुलना 'मेंढकों की उछल-कूद' से की गई।
अमीष देवगन के नए शो 'धुरंधर' और उसके प्रोमो पर भी कटाक्ष किया गया, जिसमें वे पढ़ने का अभिनय करते नजर आ रहे हैं। तंज कसते हुए कहा गया कि जब एंकरों को सिर्फ दी गई स्क्रिप्ट ही पढ़नी है, तो पढ़ाई और निष्पक्ष पत्रकारिता की उम्मीद करना बेमानी है।





