सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटने पर राशन बंद होने का खतरा बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस संबंध में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जिसमें कहा गया कि जिन व्यक्तियों का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है, वे अभी भी राशन जैसे लाभों के पात्र हो सकते हैं। अदालत ने राशन कार्ड रद्द करने के मामले में एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए उसे संबंधित हाईकोर्ट में जाने का निर्देश दिया।
यह मामला 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के बाद सामने आया, जिसमें वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने और इस आधार पर राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।
याचिका का विवरण
यह याचिका नादिया जिले के मोहिबुल्ला मंडल द्वारा दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि 'संदिग्ध नागरिकता' के आधार पर SIR के तहत जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके राशन कार्ड भी रद्द किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता के वकील शादान फरासत ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह स्पष्ट किया था कि SIR का दायरा केवल मतदाता सूची में संशोधन तक सीमित है और नागरिकता का निर्धारण केवल केंद्र सरकार का अधिकार है।
इसके बावजूद, राज्य सरकार द्वारा राशन कार्ड रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है, जो कानून के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने पहले ही संबंधित ट्रिब्यूनल में अपनी अपील दायर कर रखी है। अदालत ने ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर याचिकाकर्ता की अपील पर निर्णय सुनाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ट्रिब्यूनल का निर्णय याचिकाकर्ता के पक्ष में आता है, तो उनका नाम स्वतः मतदाता सूची में पुनः शामिल कर लिया जाएगा और वे सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ फिर से प्राप्त कर सकेंगे।
भोजन और जीवन के अधिकार का मामला
याचिकाकर्ता मोहिबुल्ला मंडल ने कहा कि उन्हें बंगाल सरकार द्वारा जनवरी 2016 में नेशनल फूड सिक्योरिटी अथॉरिटी (NFSA) के तहत 'प्रायोरिटी हाउसहोल्ड' का डिजिटल राशन कार्ड दिया गया था। अब राशन दुकान से मिलने वाला रियायती अनाज बंद हो गया है, जिससे उनके 'भोजन के अधिकार' और 'जीवन के अधिकार' को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
हालांकि इन बातों के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट जाने का विकल्प ही सुझाया। सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ने कहा, 'आप सही कह रहे हैं। अगर आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, तो भी आप कुछ लाभों के हकदार हैं। लेकिन, ये लाभ हाईकोर्ट द्वारा दिए जा सकते हैं।'
हाईकोर्ट का आश्वासन
याचिकाकर्ता के वकील शादान फरासत ने कहा कि यह प्रश्न भविष्य में कई मामलों में उठ सकता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इसे स्पष्ट करना चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो हम 100 मामलों में भी स्थिति स्पष्ट करेंगे। लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि हाईकोर्ट इस मुद्दे को अच्छी तरह समझेगा। आप संबंधित हाईकोर्ट जाइए, वे आपको राहत देंगे।'
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