जगन्नाथ स्वामी का विवादित मामला
पश्चिम बंगाल के दीघा में जगन्नाथ स्वामी की पत्थर की मूर्ति और 'धाम' के संदर्भ में विवाद जारी है। रथ यात्रा के दौरान पुरी के जगन्नाथ दैतापति, पाणिग्रही ने ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी सलाह को अनसुना किया। एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, 'मुझे दीघा धाम शब्द पर आपत्ति थी। किसी भी स्थान पर मंदिर का निर्माण संभव है, लेकिन उसे धाम नहीं कहा जा सकता।'
दैतापति का बयान
दैतापति ने आगे कहा, 'ममता बनर्जी ने मेरी सलाह का पालन नहीं किया और दीघा में धाम लिखा। केवल पुरी को ही जगन्नाथ धाम माना जा सकता है। भारत में जगन्नाथ के हजारों मंदिर हैं, लेकिन उन्हें धाम नहीं कहा जा सकता। भगवान किसी के घमंड को बर्दाश्त नहीं करते, इसीलिए ममता बनर्जी की सरकार का पतन हुआ।'
शुभेंदु अधिकारी की सराहना
दैतापति ने बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए कहा कि चुनाव के बाद उन्होंने दीघा से धाम शब्द हटा दिया। उन्होंने कहा, 'शुभेंदु हमारे शिष्य हैं और उन्होंने सही निर्णय लिया।' कई धार्मिक नेताओं ने भी दीघा के साथ धाम का उपयोग न करने की बात की है।
धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन
पुरी के मुख्य पुजारी राजेश दैतापति ने दीघा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के समय इसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्र के अनुसार पवित्र मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार ने किसी भी सलाह का पालन नहीं किया। दैतापति भवानी दास ने भी इस संदर्भ में कहा था कि मंदिर बनाना पुण्य का कार्य है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ नहीं।
दीघा में स्थापना की जानकारी
दीघा में भगवान जगन्नाथ की स्थापना मई 2025 में की गई थी। इस मंदिर का निर्माण पुरी मंदिर के मॉडल पर किया गया था। इस निर्माण को हिंदुओं के वोट बटोरने की कोशिश के रूप में देखा गया, जिसके चलते विवाद उत्पन्न हुआ।
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