Molitics Logo
होम राष्ट्रीय दीया मिर्जा बीएमसी वीडियो विवाद: हाईकोर्ट का निर्देश, बीएमसी की कार्रवाई पर उठे सवाल और प्रदूषण बनाम राजनीति का सच
राष्ट्रीय • महाराष्ट्र

दीया मिर्जा बीएमसी वीडियो विवाद: हाईकोर्ट का निर्देश, बीएमसी की कार्रवाई पर उठे सवाल और प्रदूषण बनाम राजनीति का सच

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर बीएमसी ने दीया मिर्जा का दिवाली प्रदूषण जागरूकता वीडियो दोबारा अपलोड कराया। जानिए पूरी घटना और विवाद का सच।

दीया मिर्जा बीएमसी वीडियो विवाद: हाईकोर्ट का निर्देश, बीएमसी की कार्रवाई पर उठे सवाल और प्रदूषण बनाम राजनीति का सच
फोटो: Dia Mirza BMC Video, Bombay High Court Pollution PIL, Amit Satam BMC Controversy, Diwali Noise Pollution Rules, Neeraj The Politics Show

बॉम्बे हाईकोर्ट का संज्ञान और बीएमसी का जन-जागरूकता अभियान अक्टूबर 2026 में मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में 105% की भारी वृद्धि दर्ज की गई। त्यौहारों के दौरान बढ़ते ध्वनि और वायु प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और साइलेंस जोन (अस्पताल, स्कूल और सरकारी दफ्तरों) के आसपास शोर पर सख्त पाबंदी लागू की। इसी क्रम में कोर्ट के निर्देश पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने पर्यावरण जागरूकता फैलाने के लिए बिना किसी शुल्क के बॉलीवुड हस्तियों—दीया मिर्जा, माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे को शामिल कर वीडियो तैयार कराए।

 

दीया मिर्जा का वीडियो और बीएमसी का बैकस्टेप अभियान के तहत जारी वीडियो में सभी हस्तियों ने त्यौहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाने की अपील की। हालांकि, 1 नवंबर को मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और विधायक अमित साटम तथा मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने केवल दीया मिर्जा के वीडियो पर आपत्ति जताई। मेयर ने दीया मिर्जा पर पुराने राजनीतिक बयानों और मुद्दों को लेकर निशाना साधा। इस राजनीतिक विरोध के बाद बीएमसी प्रशासन ने दिया मिर्जा का वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से हटा दिया, जबकि माधुरी दीक्षित और अन्य हस्तियों के समान अपील वाले वीडियो प्लेटफॉर्म पर बने रहे।

 

बॉम्बे हाईकोर्ट का कड़ा रुख और री-अपलोड का निर्देश बीएमसी द्वारा वीडियो हटाए जाने के फैसले पर 3 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दों को सांप्रदायिक या राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। पीठ ने टिप्पणी की कि हर नागरिक एक ही हवा में सांस लेता है और धर्मनिरपेक्ष भारत में पर्यावरण सुरक्षा किसी एक वर्ग या धर्म का विषय नहीं है। हाईकोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया कि वह दीया मिर्जा का जागरूकता वीडियो तुरंत री-अपलोड करे ताकि जनता का संविधान और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

 

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अनसुलझे संवैधानिक प्रश्न वीडियो हटाए जाने पर विपक्षी दलों ने बीएमसी और सत्ताधारी दल को आड़े हाथों लिया। शिवसेना (UBT) के आदित्य ठाकरे, कांग्रेस की वर्षा गायकवाड़ और अन्य नेताओं ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। दशकों से स्कूलों और सामाजिक अभियानों में 'से नो टू क्रैकर्स' जैसे संदेश पर्यावरण संरक्षण का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में जनहित के अभियान को धर्म और राजनीति से जोड़कर देखना यह गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि क्या पर्यावरण सुरक्षा की आवाज उठाना भी अब विवाद का कारण बनेगा?

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/SnC55Enq7-g?si=JsHy5ix1lF0WLugO

 
Video