सांसद का समर्थन और प्रदर्शन
कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले ने बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोक जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले चल रहे प्रदर्शन में अपना समर्थन व्यक्त किया। पडोले ने यह भी कहा कि वह 20 जुलाई को संसद तक आयोजित होने वाले मार्च में भाग लेंगे।
पडोले ने आरोप लगाया कि देश के युवाओं के सपने सरकारी भ्रष्टाचार के कारण अधूरे रह गए हैं। उन्होंने वांगचुक के प्रति अपना समर्थन जताया, जबकि कांग्रेस ने इस प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी है। महाराष्ट्र के भंडारा गोंदिया से लोकसभा सदस्य ने कहा, 'बच्चों ने जो सपना देखा है, वह पूरा नहीं हो रहा है क्योंकि यह सरकारी भ्रष्टाचार है। पिछले 10 वर्षों में 70 बार पेपर लीक हुए हैं।'
युवाओं की सराहना
पडोले ने आंदोलन में शामिल युवाओं की सराहना करते हुए कहा, 'मैं आपका धन्यवाद करता हूं कि आप छात्रों के हक के लिए लड़ रहे हैं। मैं दिलो-जान से आप लोगों का समर्थन करता हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी उनकी जरूरत होगी, वह वहां उपस्थित रहेंगे। साथ ही, उन्होंने Sonam Wangchuk
स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'सोनम जी देश के हीरा हैं और वे हमेशा स्वस्थ रहें।'
कांग्रेस सांसद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि यदि उनमें ईमानदारी होती तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के नेताओं ने छोटी-छोटी बातों पर भी इस्तीफा दिया है। क्या इस सरकार के लिए लोगों की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण सत्ता है?'
वांगचुक का अनशन और अदालत की सुनवाई
कॉकरोक जनता पार्टी ने NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया है। Sonam Wangchuk
28 जून से इस आंदोलन में शामिल हैं और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। CJP ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने की भी घोषणा की है।
दिल्ली हाई कोर्ट में वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताने वाली जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने जा रही है। उच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन द्वारा आहूत कार्य बहिष्कार के चलते संबंधित प्राधिकारियों ने अदालत में कोई पेश नहीं किया। इसके बाद, मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी।
याचिका में उठाए गए मुद्दे
पीठ ने कहा, 'मामले की तात्कालिकता को देखते हुए इसे कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।' अदालत ने आदेश की एक प्रति संबंधित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के वकील को देने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने अपनी याचिका में कहा कि स्थिति 'दुखद' और 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है, क्योंकि एक प्रदर्शनकारी नागरिक 'पूरे देश के सामने अपनी जान दे रहा है।' उन्होंने अनुरोध किया कि संबंधित प्राधिकारियों को वांगचुक की मदद करने और उनसे इस मुद्दे पर चर्चा करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि कार्यकर्ता को जबरन भोजन कराया जाए। सैनी ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर चिंतित नहीं दिखती, परंतु अदालत किसी नागरिक को 'स्वेच्छा से भूख से मरने' की अनुमति नहीं देगी।
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