भारत लौटने के बाद ओवैसी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “जिन देशों का दौरा किया, वहां काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। हमने उन्हें बताया कि भारत ने पहले भी पाकिस्तान से बातचीत की थी। 26/11 और पठानकोट हमले के बाद, लेकिन परिणाम शून्य रहा। हमने सबूत दिए कि हालिया पहलगाम हमले के बाद TRF की जिम्मेदारी लेने वाले ईमेल पाकिस्तान के मिलिट्री कैंटोनमेंट क्षेत्र से किए गए थे। अब पाकिस्तान इससे कैसे इनकार कर सकता है?”
‘हम बीजेपी के लिए नहीं, भारत के लिए गए थे’
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि विदेश में भारत की बात रखने का मतलब बीजेपी का समर्थन नहीं है। उन्होंने कहा, “हम बीजेपी की मुखालफत करते आए हैं और करते रहेंगे। विदेश इसलिए गए क्योंकि भारत की आवाज़ दुनिया तक पहुंचानी थी। पाकिस्तान की नापाक हरकतों को उजागर करना ज़रूरी था। ये दौरा प्रधानमंत्री मोदी या किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं था, बल्कि देश के लिए था।” ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान में फैले आतंकवाद की जड़ वहां की अवैध वित्तीय प्रणाली है। उन्होंने MENAFATF देशों से अपील की कि वे भारत की इस पहल में सहयोग करें ताकि पाकिस्तान को एक बार फिर FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जा सके।
AIMIM प्रमुख ने यह भी बताया कि जिन खाड़ी देशों का दौरा किया गया, वे पहले भी भारत का समर्थन कर चुके हैं। “2018 में जब पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था, तब इन देशों ने भारत का साथ दिया था। अब भारत फिर चाहता है कि पाकिस्तान की आतंकी भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर किया जाए।”





