बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की आशंका
राजस्व विभाग को आशंका है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को ईडब्लूएस प्रमाणपत्र दिए गए हैं, जो इस योजना के वास्तविक लाभार्थी नहीं हैं। ऐसे में सरकार अब तक जारी किए गए सभी प्रमाणपत्रों की गहन जांच करवाएगी। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह रोक कब तक प्रभावी रहेगी या जांच कितने समय में पूरी होगी।
ईडब्लूएस प्रमाणपत्र उन लोगों को जारी किया जाता है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 5 लाख रुपये से कम होती है। इस आय में कृषि, व्यापार और वेतन समेत सभी स्रोतों से होने वाली आमदनी शामिल होती है।
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा और विश्वविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इससे शिक्षा और रोजगार के लिए ईडब्लूएस आरक्षण का लाभ उठाने वाले छात्रों और युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दिल्ली के निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें ईडब्लूएस वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित हैं, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय में भी इस वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण मिलता है।
इससे पहले 7 अप्रैल को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में राजस्व विभाग को ईडब्लूएस प्रमाणपत्रों में अनियमितताओं की जांच के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी जिला अधिकारियों को 15 दिन के भीतर अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी सौंपने को कहा गया है।





