कोर्ट ने असम सरकार को झूठी गवाही पर दी चेतावनी
न्यायमूर्ति ओका ने कहा कि असम सरकार तथ्यों को दबा रही है। इस पर भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सफाई दी कि उन्होंने उच्च अधिकारियों से बात की है और "कुछ कमियों" के लिए माफी मांगी है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर तथ्यों को छिपाने की कोशिश की गई, तो झूठी गवाही का नोटिस जारी किया जाएगा। न्यायमूर्ति भुइयां ने असम सरकार से कड़ा सवाल पूछते हुए कहा, “एक बार जब किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित कर दिया जाता है, तो अगला तार्किक कदम उसका निर्वासन होना चाहिए। आप उन्हें अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रख सकते।” कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि राज्य में मौजूद कई विदेशी हिरासत केंद्रों से अब तक कितने अवैध अप्रवासियों को निर्वासित किया गया है।
"विदेशियों का पता नहीं होने पर भी उन्हें निर्वासित करें"
असम सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कि विदेशियों के पते ज्ञात नहीं हैं, न्यायमूर्ति ओका ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति पाकिस्तान से है, तो आपको पाकिस्तान की राजधानी का पता तो होगा? आप उन्हें वहीं निर्वासित कर सकते हैं। उन्हें अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।" कोर्ट ने असम सरकार से यह भी पूछा कि उसने निर्वासन प्रक्रिया को पूरा करने में सहायता के लिए विदेश मंत्रालय से कोई आधिकारिक अनुरोध क्यों नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध अप्रवासियों को तुरंत उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि वह असम सरकार द्वारा अवैध अप्रवासियों के निर्वासन में हो रही देरी को गंभीरता से ले रही है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार की ढील सहन नहीं की जाएगी और जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए।
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