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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: NIA मामलों में 90 दिनों की देरी पर भी सुनवाई संभव

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ एनआईए अधिनियम 2008 की धारा 21(5) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर |

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: NIA मामलों में 90 दिनों की देरी पर भी सुनवाई संभव
फोटो: NIA, Supreme Court
उच्चतम न्यायालय ने 4 जनवरी को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 के तहत अभियुक्तों या पीड़ितों द्वारा दायर की गई अपीलों को सिर्फ इस आधार पर खारिज नहीं किया जाएगा कि वे 90 दिनों की निर्धारित अवधि से अधिक समय के बाद दायर की गई हैं।

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ एनआईए अधिनियम 2008 की धारा 21(5) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोई आरोपी या पीड़ित अपील करता है, तो उसे केवल इस कारण से अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि 90 दिनों से अधिक की देरी हुई है। कोर्ट ने अपने आदेश में पक्षकारों को यह निर्देश भी दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले अधिकतम तीन पृष्ठों का लिखित प्रस्तुतिकरण दाखिल करें।

क्या कहता है एनआईए अधिनियम की धारा 21(5)?


एनआईए अधिनियम की धारा 21(5) के अनुसार, किसी भी निर्णय, दंडादेश या आदेश के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए। हालांकि, यदि उच्च न्यायालय को यह उचित लगता है कि अपीलकर्ता के पास 30 दिनों के भीतर अपील न करने के पर्याप्त कारण थे, तो वह निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील को स्वीकार कर सकता है।

इस आदेश को उस समय पारित किया गया जब अदालत एनआईए अधिनियम को चुनौती देने और यूएपीए संशोधन अधिनियम 2019 से संबंधित मामलों की सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से एनआईए अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अभियुक्तों और पीड़ितों को राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।

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