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Telangana Tunnel Collapse: 72 घंटे बाद भी श्रमिकों से संपर्क नहीं, बचाव कार्य जारी

बचाव अभियान में एसडीआरएफ, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियां लगातार जुटी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है।

Telangana Tunnel Collapse: 72 घंटे बाद भी श्रमिकों से संपर्क नहीं, बचाव कार्य जारी
फोटो: Telangana Tunnel Collapse,
तेलंगाना के श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग हादसे को 72 घंटे से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अब तक फंसे हुए आठ मजदूरों का कोई पता नहीं चल पाया है। शनिवार सुबह इस सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से श्रमिक अंदर फंस गए थे। बचाव अभियान में एसडीआरएफ, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियां लगातार जुटी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है।

राज्य सरकार ने विशेषज्ञों को बुलाया है, जिसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और राष्ट्रीय भौगोलिक अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) के विशेषज्ञ शामिल हैं। ये विशेषज्ञ बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और जरूरी तकनीकी सलाह दे रहे हैं। नगरकुरनूल के जिला कलेक्टर बी संतोष ने बताया कि फंसे हुए मजदूरों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे उनके जीवित होने की संभावना लगातार कम होती जा रही है।

बचाव अभियान में अब भी चुनौतियां


बचाव दल सुरंग के अंदर जमा पानी को बाहर निकालने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन सुरंग के अंतिम 40-50 मीटर हिस्से में भारी मलबा जमा होने के कारण अब तक कोई प्रगति नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और एलएंडटी के विशेषज्ञों की मदद से एक नई रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि बचाव दल आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यालय ने जानकारी दी कि सुरंग में फंसे चार मजदूर झारखंड के रहने वाले हैं और उनके परिवार के सदस्य तेलंगाना के लिए रवाना हो चुके हैं। प्रत्येक मजदूर के एक परिजन को पुलिस अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर भेजा गया है।

उत्तराखंड से ‘रैट माइनर्स’ की टीम भी जुटी


2023 में उत्तराखंड की सिल्कयारा सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने वाले ‘रैट माइनर्स’ की एक टीम भी बचाव कार्य में शामिल हो गई है। सोमवार को घटनास्थल पर पहुंची इस टीम ने कहा कि वे सबसे पहले अंदर की स्थिति की समीक्षा करेंगे और फिर अगली कार्रवाई की योजना बनाएंगे। बचाव कार्य में अत्याधुनिक उपकरणों की भी मदद ली जा रही है। सोमवार को एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरों को सुरंग के भीतर भेजा गया, ताकि वहां की स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके। एनडीआरएफ का डॉग स्क्वायड भी मौके पर मौजूद है। अधिकारियों का कहना है कि फंसे हुए मजदूरों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सुरंग में पाइप बिछाई जा रही है। 

फंसे हुए श्रमिकों की पहचान उत्तर प्रदेश के मनोज कुमार और श्री निवास, जम्मू-कश्मीर के सनी सिंह, पंजाब के गुरप्रीत सिंह और झारखंड के संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू के रूप में हुई है। इनमें दो इंजीनियर, दो ऑपरेटर और चार मजदूर शामिल हैं। बचाव दल लगातार कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक किसी भी श्रमिक से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। तेलंगाना सरकार के मंत्री जे कृष्णा राव ने स्वीकार किया कि उनके बचने की संभावना बहुत कम है। उन्होंने कहा, "मैं घटनास्थल पर गया था, जहां लगभग 50 मीटर की दूरी पर मलबा जमा है। सुरंग का 9 मीटर व्यास है, लेकिन करीब 30 फीट क्षेत्र में कीचड़ भरा हुआ है। हमने उनके नाम पुकारे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। ऐसे में उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं।"

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