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Telangana Tunnel: हाई-टेक ड्रोन, सोनार और रोबोट से बचाव अभियान जारी, 11 एजेंसियां जुटीं

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने मंगलवार को द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी हाल में हार नहीं मानेगी |

Telangana Tunnel:  हाई-टेक ड्रोन, सोनार और रोबोट से बचाव अभियान जारी, 11 एजेंसियां जुटीं
फोटो: Telangana Tunnel
तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में स्थित श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग में फंसे आठ कर्मियों को अब तक सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका है। हालांकि, बचाव दल ने सुरंग के विशाल हिस्से—13.85 किलोमीटर में से 13.79 किलोमीटर तक सफलतापूर्वक पहुंच बना ली है। मगर अंतिम कुछ मीटर की दूरी पार करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि सुरंग के ढह चुके हिस्से में पानी और गाद का मिश्रण बचाव कार्य को कठिन बना रहा है। इस कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों जैसे कि कैमरा-सक्षम ड्रोन, सोनार और पोर्टेबल कैमरा रोबोट की सहायता ली जा रही है, जो संकरी और कठिन जगहों तक पहुंचने में सक्षम हैं।

राज्य सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन को दी सर्वोच्च प्राथमिकता


तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने मंगलवार को द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी हाल में हार नहीं मानेगी जब तक कि सुरंग में फंसे सभी आठ लोगों को ढूंढ नहीं लिया जाता। घटनास्थल का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा, "हम बचाव कार्य में कोई कोताही नहीं बरतेंगे और जब तक सभी को सुरक्षित नहीं निकाल लिया जाता, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। इसके लिए चाहे जितने भी दिन लग जाएं, सरकार अपनी पूरी ताकत झोंक देगी।" उन्होंने यह भी बताया कि न केवल भारत के बेहतरीन विशेषज्ञ इस अभियान में शामिल हैं, बल्कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से भी संपर्क कर रही है, जिनके पास ऐसी विषम परिस्थितियों से निपटने का गहन अनुभव है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में लगीं 11 राष्ट्रीय और राज्य एजेंसियां


तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने मंगलवार शाम को जानकारी दी कि इस बचाव अभियान में कुल 11 राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां पूरी क्षमता से कार्यरत हैं। इनमें भारतीय सेना, नौसेना, मार्कोस कमांडो, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), MORPH, सिंगरेनी, HYDRAA, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), नवयुग, एलएंडटी सुरंग विशेषज्ञ और राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) शामिल हैं। मंत्री रेड्डी ने कहा, "हमने अतीत में हुई ऐसी ही घटनाओं का गहन अध्ययन किया है और उनसे महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। इसीलिए इस बार हम बचाव कार्य को उच्चतम स्तर की विशेषज्ञता और सटीकता के साथ अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।"

रेस्क्यू ऑपरेशन की जटिलताओं के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री रेड्डी ने कहा, "सुरंग के अंदर पानी का लगातार बढ़ता प्रवाह, गाद का जमाव और भारी मलबा बचाव कार्य के लिए प्रमुख बाधाएं बने हुए हैं। इन कठिनाइयों के बावजूद, हमारे कर्मी अद्वितीय समर्पण और अथक परिश्रम का परिचय दे रहे हैं। वे बिना रुके, बिना आराम किए लगातार काम कर रहे हैं।" हालात की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ के पानी को निकालने के लिए उच्च क्षमता वाले पंप लगाए जा रहे हैं, लेकिन बचाव कार्य अब भी बेहद कठिन बना हुआ है। सुरंग के अंदर बचाव दल ने रेल पटरी को साफ करने का कार्य भी शुरू कर दिया है ताकि जरूरी उपकरणों को आगे तक ले जाया जा सके। अब तक कम से कम दो किलोमीटर तक पटरी को साफ किया जा चुका है, और बचाव दल उस स्थान से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर हैं, जहां सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था।

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