संजय राउत ने राजनीतिक दलों को एकजुट होकर काम करने की सलाह दी, विशेष रूप से बड़ी पार्टियों को। उन्होंने कांग्रेस को एनडीए के दिनों की याद दिलाते हुए बीजेपी से कुछ सीखने की नसीहत दी। राउत ने कहा कि यह (त्याग) वही है जो बीजेपी करती थी जब वे एनडीए में शामिल थे। अब कांग्रेस को भी ऐसा ही त्याग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी के साथ बातचीत हमेशा चलती रहती थी, लेकिन कांग्रेस को भी उस संवाद को बरकरार रखना चाहिए।
इसके अलावा, संजय राउत ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि रामलला को संघ नहीं लाया है और मोहन भागवत संविधान नहीं लिखते हैं। उनकी कही गई बातें गलत हैं। राउत ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में वे खुद भी शामिल थे, और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
उधर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि इंडिया ब्लॉक अगर सिर्फ संसदीय चुनावों के लिए था, तो इसे समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब गठबंधन में संवाद और बैठकें नहीं होती हैं, तो अस्पष्टता की स्थिति बनी रहती है। उमर अब्दुल्ला के इस बयान के बाद विपक्षी इंडिया ब्लॉक में शामिल दलों के बीच ही गठबंधन के औचित्य और भविष्य को लेकर बहस छिड़ गई है।
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