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संदीप दीक्षित का आरोप: CAG रिपोर्ट से पता चलता है कि शराब नीति में ठेकेदारों से थी सांठगांठ

दिल्ली विधानसभा में कैग रिपोर्ट के पेश होने के बाद राजनीतिक वातावरण और भी गर्मा गया है। आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी BJP एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप |

संदीप दीक्षित का आरोप: CAG रिपोर्ट से पता चलता है कि शराब नीति में ठेकेदारों से थी सांठगांठ
फोटो: Sandeep Dixit, CAG report
दिल्ली विधानसभा में कैग रिपोर्ट के पेश होने के बाद राजनीतिक वातावरण और भी गर्मा गया है। आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर अपनी राजनीतिक लड़ाई को और बढ़ा रहे हैं। विशेष रूप से, शराब घोटाले से संबंधित कैग की पहली रिपोर्ट के सामने आने के बाद दोनों पार्टियों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार की शराब नीति में कई तरह की खामियां और अनियमितताएं थीं, जिन्हें लेकर विपक्षी दलों ने आप सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा, बाकी 13 रिपोर्टें भी जल्द ही पेश की जाएंगी, जो इस मामले की गहराई में जाकर और भी कई राज खोल सकती हैं।

 संदीप दीक्षित, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे हैं और इस बार नई दिल्ली सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार भी हैं, उन्होंने कैग रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना था कि दिल्ली में शराब के ठेकेदारों को नई शराब नीति के बारे में पहले से जानकारी थी, जिससे यह साबित होता है कि नीति बनाने में गड़बड़ी की गई थी। उन्होंने पीटीआई से बातचीत करते हुए कहा कि सीएजी की रिपोर्ट यह स्पष्ट रूप से बताती है कि कई नीतिगत फैसले गलत तरीके से लिए गए हैं। संदीप दीक्षित ने आगे कहा कि रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे पहले से ही लोगों के बीच चर्चा का विषय थे। उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि जैसे-जैसे रिपोर्ट को और विस्तार से पढ़ा जाएगा, वैसे-वैसे और भी बड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि गंभीर मुद्दों को पहले ही प्रवर्तन एजेंसियों जैसे ईडी और सीबीआई ने उजागर किया है, और कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही इन मामलों को उजागर करती आई है।

 संदीप दीक्षित का कहना है कि नई शराब नीति का फायदा केवल कुछ विशेष लोगों को हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां दिल्ली सरकार की योजना थी कि केवल दो शराब की दुकानें खोली जाएं, वहां अचानक 54 दुकानें खोल दी गईं, और लाइसेंस उन इलाकों में बांटे गए, जहां पर राजनीतिक फायदे का पूरा अवसर था। यह मामला केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि एक गहरी सांठगांठ का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शराब के ठेकेदारों को पहले से ही इस नीति के बारे में पूरी जानकारी थी और यह पूरी प्रक्रिया गलत तरीके से बनाई गई थी। 

 संदीप दीक्षित ने यह भी कहा कि इस शराब नीति के निर्माण में दिल्ली सरकार, शराब के ठेकेदारों और निर्माताओं के बीच आपसी समझौता था, जिससे नीति को इस तरह से तैयार किया गया कि कुछ खास लोग लाभान्वित हो सकें। उनका कहना था कि इस प्रकार के नीतिगत फैसले दिल्ली की जनता के हित में नहीं थे और इन फैसलों के कारण ही आज यह विवाद खड़ा हुआ है।

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