दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद अरविंद केजरीवाल पहली बार अपने काफिले के साथ नजर आए, लेकिन यह काफिला दिल्ली में नहीं, बल्कि पंजाब में था। केजरीवाल अगले 10 दिनों तक पंजाब के विपासना सेंटर में रहेंगे, जो उन्होंने साल की शुरुआत में कई बार अपने ध्यान और साधना के लिए चुना है। हालांकि, उनके इस काफिले को लेकर कई राजनीतिक आलोचनाएं हो रही हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को अब भव्य और आलीशान जीवनशैली की आदत हो चुकी है और वह सत्ता के लालची हो गए हैं। दीक्षित ने कहा, "मैं पिछले 10 साल से यह कह रहा हूं कि वह सत्ता के भूखे हैं। जब उन्हें सादगी के आधार पर वोट मिलते थे, तब भी हमने कहा था कि यह केवल एक दिखावा है। आज वह इतने आदी हो गए हैं फिजूलखर्ची के कि विपासना में भी उनका काफिला 100 गाड़ियों का है।"
संदीप दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल ने सत्ता में आते ही अपनी जीवनशैली में भारी बदलाव किया है, जिससे यह साबित होता है कि उनकी राजनीति केवल दिखावा है। दीक्षित ने यह भी जोड़ा कि अगर उनकी नीयत सच्ची होती, तो वह इस तरह के भव्य काफिले के बजाय जनता की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते।
इस बीच, केजरीवाल और उनकी पार्टी के खिलाफ इस तरह के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं, खासकर जब वह पंजाब में अपनी विपासना यात्रा पर थे। वहीं, उनके समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि यह निजी यात्रा है और इसे राजनीति से जोड़कर देखना ठीक नहीं है। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं, जिससे यह साबित होता है कि उनके काफिले की संख्या और उनकी जीवनशैली पर उठते सवाल राजनीतिक विमर्श का एक अहम हिस्सा बन गए हैं।
इससे पहले आम आदमी पार्टी (आप) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के काफिले का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया था। मालीवाल ने लिखा, "जिस पंजाब की जनता ने इतना प्यार दिया, उससे इतना डर लगता है केजरीवाल जी को?" इसके बाद उन्होंने कहा, "जो नेता पूरी दुनिया को VIP कल्चर पर टोकते थे, वही आज खुद डोनाल्ड ट्रंप से भी बड़ा सुरक्षा घेरा लेकर घूम रहे हैं। यह वास्तव में हैरान करने वाला है कि कैसे पंजाब जैसे ऐतिहासिक और महान राज्य को अपनी ऐशो-आराम की सुविधा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।"





