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दिल्ली में दागी नेताओं की संख्या घटी, फिर भी 31 विधायक गंभीर मामलों में आरोपी

पार्टीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के 48 में से 16 और आप के 22 में से 15 विधायक आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से भाजपा के सात और आप के |

दिल्ली में दागी नेताओं की संख्या घटी, फिर भी 31 विधायक गंभीर मामलों में आरोपी
फोटो: Delhi, ADR report Delhi, MLA delhi
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विधायकों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। चुनावी निगरानी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 70 में से 31 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो कि 2020 के चुनाव में 43 विधायकों की तुलना में कम है। हालांकि, गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विधायकों की उपस्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।

पार्टीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के 48 में से 16 और आप के 22 में से 15 विधायक आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से भाजपा के सात और आप के 10 विधायक गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं। चुनावी हलफनामों के विश्लेषण से पता चला कि 17 नवनिर्वाचित विधायकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी धाराएं भी शामिल हैं। 2020 के चुनाव में यह संख्या 37 थी।

इस बार चुनाव में विजयी हुए विधायकों की आर्थिक स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। 70 नवनिर्वाचित विधायकों के पास कुल 1,542 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में प्रति विधायक औसत संपत्ति 14.29 करोड़ रुपये थी, जो इस बार बढ़कर 22.04 करोड़ रुपये हो गई है। भाजपा के विधायकों की औसत संपत्ति सबसे अधिक 28.59 करोड़ रुपये रही, जबकि आप के विधायकों की औसत संपत्ति 7.74 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

दिल्ली विधानसभा में सबसे अमीर विधायक भाजपा के करनैल सिंह हैं, जिनकी संपत्ति 259.67 करोड़ रुपये है। उनके बाद मनजिंदर सिंह सिरसा (248.85 करोड़ रुपये) और परवेश वर्मा (115.63 करोड़ रुपये) का नाम आता है। दिलचस्प बात यह है कि परवेश वर्मा पर 74 करोड़ रुपये की देनदारी भी है, जो सभी विजयी उम्मीदवारों में सबसे अधिक है। इसके विपरीत, आप के तीन विधायकों ने अपने हलफनामे में 20 लाख रुपये से कम की संपत्ति घोषित की है।

शैक्षणिक योग्यता के मामले में, 64 प्रतिशत विधायक स्नातक या उससे ऊपर की डिग्री रखते हैं, जबकि 33 प्रतिशत विधायकों की शैक्षणिक योग्यता कक्षा 5 से 12वीं के बीच है। आयु वर्ग के अनुसार, 67 प्रतिशत विधायकों की उम्र 41 से 60 वर्ष के बीच है, जबकि 20 प्रतिशत विधायक 60 साल से अधिक उम्र के हैं। इस बार चुनाव में महिला प्रतिनिधित्व में गिरावट आई है। 2020 में 8 महिलाएं विधायक चुनी गई थीं, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 5 रह गई है। वहीं, पुनर्निर्वाचित विधायकों की संपत्ति में औसतन 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। 2020 में इनकी औसत संपत्ति 7.04 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में 8.83 करोड़ रुपये हो गई है।

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