शिवसेना का असंतोष और तर्क
शिवसेना का कहना है कि रायगढ़ और नासिक जिलों में पार्टी का मजबूत आधार है। पार्टी को उम्मीद थी कि रायगढ़ का प्रभारी मंत्री भारत गोगावाले और नासिक का दादा भुसे को नियुक्त किया जाएगा। शिवसैनिकों ने आरोप लगाया कि एनसीपी और भाजपा के बीच गठजोड़ के चलते शिवसेना को नजरअंदाज किया गया। स्थानीय शिवसेना नेताओं ने इस फैसले को जिलों के विकास में बाधा और क्षेत्रीय समीकरणों की अनदेखी बताया। शिवसेना के तीखे विरोध और प्रदर्शन के बाद सरकार ने देर रात एक बैठक बुलाई और प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति पर फिलहाल के लिए रोक (स्टे) लगा दी। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, अब शिवसेना के साथ चर्चा कर आम सहमति से फैसला लिया जाएगा।
महाराष्ट्र में प्रभारी मंत्री को गार्जियन मिनिस्टर कहा जाता है। उनका मुख्य कार्य जिले में विकास योजनाओं की समीक्षा और निगरानी करना होता है। गार्जियन मिनिस्टर का पद राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण इसे लेकर दलों के बीच खींचतान आम बात है। शिवसेना का मानना है कि एनसीपी और भाजपा नेताओं को इन पदों पर नियुक्त करने से स्थानीय समीकरण बिगड़ सकते हैं। शिवसेना का यह भी दावा है कि रायगढ़ और नासिक जिलों में एकनाथ शिंदे का मजबूत जनाधार है। ऐसे में इन पदों को अन्य दलों को सौंपना अनुचित है।
सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द ही शिवसेना के साथ एक बैठक बुलाने की योजना बनाई है। उम्मीद की जा रही है कि सभी पक्षों के बीच सामंजस्य बनाकर गार्जियन मिनिस्टर की नई नियुक्ति की जाएगी। इस विवाद ने एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार के भीतर सत्ता-साझेदारी के जटिल समीकरणों को उजागर कर दिया है।
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