जीतन राम मांझी ने जहानाबाद में आयोजित एक सम्मेलन में बयान दिया कि झारखंड और दिल्ली में उनकी पार्टी के साथ टिकट बंटवारे में न्याय नहीं किया गया। उनका आरोप है कि दोनों राज्यों में चुनावी टिकट वितरण के दौरान उनकी पार्टी की ताकत और स्थिति को ठीक से नहीं आंका गया, और इसलिए उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अब बिहार में वह अपनी "औकात" दिखाना चाहते हैं, विशेष रूप से अपने समाज और पार्टी के समर्थकों के बीच।
मांझी का कहना था कि बिहार में अब वही गलतियां नहीं दोहराई जाएंगी, जो झारखंड और दिल्ली में हुईं, और पार्टी अपने अधिकारों के लिए पूरी ताकत से लड़ने को तैयार है।
जब मांझी से यह पूछा गया कि क्या वे एनडीए (NDA) से नाराज हैं, तो उन्होंने इसका सीधा और सटीक जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मैं नाराज नहीं हूं। घर में रोटी की मांग तो गार्जियन से की जाती है। अगर मुझे चार रोटियों की भूख है और एक भी रोटी नहीं मिल रही है, तो मुझे गार्जियन से मांगने का हक है। यही मेरी मांग है, मैंने दो जगहों पर टिकट की उम्मीद जताई थी, लेकिन वहां मुझे मौका नहीं मिला।"
मांझी ने आगे कहा कि उनके पार्टी कार्यकर्ता बिहार विधानसभा चुनाव में 40 सीटों की मांग कर रहे हैं, ताकि वे कम से कम 20 सीटों पर जीत हासिल कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी इतनी सीटें जीतने में सफल हो जाती है, तो वे अपने नीति के अनुसार बिहार में विकास के कार्यों को तेज़ी से और प्रभावी रूप से लागू करेंगे। उनका यह बयान यह स्पष्ट करता है कि वे बिहार चुनाव को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं और किसी भी स्थिति में अपनी पार्टी को सत्ता में लाने की पूरी कोशिश करेंगे।





