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खड़गे का सरकार पर हमला, बोले— जेपीसी रिपोर्ट लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ, इसे रद्द किया जाए

मल्लिकार्जुन खड़गे ने वक्फ बिल पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट को पूरी तरह "अलोकतांत्रिक" बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, |

खड़गे का सरकार पर हमला, बोले— जेपीसी रिपोर्ट लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ, इसे रद्द किया जाए
फोटो: JPC Report, Kharge
राज्यसभा में वक्फ बिल को लेकर तीखी बहस और भारी हंगामे के बीच विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) की रिपोर्ट से विपक्ष के सदस्यों के 'डिसेंट नोट्स' (असहमति के नोट) को हटा दिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

सभापति जगदीप धनखड़ ने दी सफाई


सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में शांति बनाए रखने पर जोर दिया और कहा, "जब सोनिया गांधी जी को बोलना था, तब मैंने सुनिश्चित किया कि सत्ता पक्ष की ओर से भी पिन ड्रॉप साइलेंस रहे। मेरी कोशिश रहती है कि हर सदस्य को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले।" इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष ने सभापति की सलाह का पालन किया, लेकिन सत्तापक्ष को भी इसी तरह अनुशासन में रहना चाहिए। उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की ओर इशारा करते हुए कहा, "नड्डा साहब ने अपने सदस्यों को नियंत्रण में रखा है, लेकिन अगर सत्ता पक्ष भी हमारी तरह अनुशासन बनाए तो सदन की कार्यवाही बेहतर चलेगी।"

विपक्ष ने जेपीसी रिपोर्ट को बताया "फर्जी", फिर से विचार करने की मांग


मल्लिकार्जुन खड़गे ने वक्फ बिल पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट को पूरी तरह "अलोकतांत्रिक" बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमारे कई सदस्यों ने इस रिपोर्ट पर डिसेंट नोट्स दिए हैं। उन असहमति के नोट्स को रिपोर्ट से हटा देना संविधान के खिलाफ है। क्या सभी सदस्यों ने बिना पढ़े-लिखे डिसेंट नोट्स दिए थे? रिपोर्ट में इन विचारों को शामिल किए बिना इसे सदन के सामने पेश करना गलत है।" खड़गे ने आगे कहा, "जो लोग स्टेकहोल्डर नहीं हैं, उन्हें बाहर से बुलाकर उनके विचार लिए गए, जबकि वास्तविक स्टेकहोल्डरों की बातों को नजरअंदाज कर दिया गया। जब संविधान के खिलाफ चीजें होती हैं, तो विरोध तो होगा ही। यही कारण है कि सदस्य आंदोलन कर रहे हैं, वे अपने व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंतित हैं।"

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति जगदीप धनखड़ से अनुरोध किया कि रिपोर्ट को खारिज कर इसे दोबारा जेपीसी के पास भेजा जाए। उन्होंने कहा, "नड्डा साहब पुराने नेताओं को सुनते हैं और आपके प्रभाव को भी मानते हैं। इसलिए मेरी आपसे विनती है कि इस बिल को जेपीसी को दोबारा भेजा जाए और इसे संवैधानिक तरीके से फिर से लाया जाए। हम तब इस पर विचार करेंगे।" उन्होंने आगे सुझाव दिया कि सभापति के पास भी यह अधिकार है कि वह इस रिपोर्ट को खारिज कर सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "कई राज्यों में राज्यपाल भी विधेयकों को अस्वीकार कर देते हैं, ऐसे में आप भी इस रिपोर्ट को अस्वीकार कर सकते हैं।"

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