सरकारी ब्रीफिंग के दौरान विदेश सचिव विक्रम मित्री ने बताया कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला "अत्यधिक बर्बर" था, जिसमें पीड़ितों को उनके परिजनों के सामने और बेहद करीब से सिर में गोली मारी गई। उन्होंने कहा कि यह हमला कश्मीर में सामान्य स्थिति को अस्थिर करने के मकसद से किया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की खुफिया एजेंसियों को सीमा पार से और हमलों की आशंका है, जिससे निपटने के लिए समय पर और सटीक जवाबी कार्रवाई जरूरी थी। मित्री ने कहा, "हमारी कार्रवाई संयमित, आनुपातिक और जिम्मेदार थी, और इसका उद्देश्य केवल आतंकी ढांचे को खत्म करना था।"
विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने जानकारी दी कि कुल नौ आतंकी शिविरों को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी लक्ष्यों का चयन इस तरह किया गया था कि किसी भी नागरिक या बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचे।
इस ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी ने हमलों के वीडियो भी प्रस्तुत किए, जो दर्शाते हैं कि भारतीय सेना ने कितनी सटीकता से इन ऑपरेशनों को अंजाम दिया।
'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद की गई थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। यह ऑपरेशन विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया।





