उन्होंने कहा,
"यदि हम आपस में संवाद करेंगे, तो कई संदेह दूर हो सकते हैं। हमने हमेशा यही कोशिश की है कि किसी भी प्रकार के संदेह को खत्म किया जाए। इसी कारण कोर कमांडर्स को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने स्तर पर जहां भी संभव हो, समस्या का हल निकाल सकें। इसके लिए उन्हें किसी उच्च अनुमति की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। यदि बातचीत से कोई मसला हल हो सकता है, तो उसे हल किया जाना चाहिए।"
राहुल गांधी के बयान पर क्या बोले सेना प्रमुख?
राहुल गांधी के उस बयान पर भी जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जवाब दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि लद्दाख सेक्टर में चीनी घुसपैठ हुई थी। इस पर उन्होंने साफ कहा कि सेना को राजनीति में घसीटना उचित नहीं है। सेना हमेशा देश की रक्षा के लिए कार्यरत रहती है और उसका राजनीतिक विवादों में शामिल होना गलत परंपरा को जन्म दे सकता है। महिलाओं को भारतीय सेना में भर्ती करने को लेकर अपनी "देवी काली" वाली टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनका आशय वीरता और शक्ति से था।
उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का उल्लेख करते हुए कहा,
"बुंदेले हरबोलों के मुँह, हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को वह पूरी तरह से समर्थन देते हैं और चाहते हैं कि वे सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनें। शहीद सैनिकों के परिवारों को सूचना देने की कठिन जिम्मेदारी के सवाल पर सेना प्रमुख ने कहा कि यह एक बेहद दर्दनाक अनुभव होता है। लेकिन सेना सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह काम करती है। उन्होंने कहा,
"आज भी जब हम कोई कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो शहीदों की विधवाएं बड़ी संख्या में उसमें शामिल होती हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हम उन्हें अकेला नहीं छोड़ते, बल्कि एक परिवार की तरह हमेशा उनके साथ खड़े रहते हैं।"
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