क्या कहती है दिल्ली सरकार की रिपोर्ट?
वहीं दिल्ली सरकार ने हाल ही में राजधानी की वायु गुणवत्ता को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट विधानसभा में पेश की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की कई खामियों को उजागर किया गया है। यह रिपोर्ट पिछले दो वर्षों से लंबित 14 रिपोर्ट्स में से एक थी।
रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दिल्ली में वाहनों से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयास बेहद कमजोर रहे हैं। कारों और अन्य वाहनों को दिए गए प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्रों में अनियमितताएं पाई गई हैं, वहीं वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण उपायों के खराब क्रियान्वयन, रियल-टाइम डेटा की अनुपलब्धता, और सार्वजनिक परिवहन के अभाव जैसे मुद्दे भी उजागर हुए हैं। रिपोर्ट बताती है कि वाहनों से निकलने वाले धुएं को दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है, लेकिन इसके बावजूद निगरानी के लिए स्थापित स्टेशन CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं।
साथ ही यह भी कहा गया कि दिल्ली सरकार के पास प्रमुख प्रदूषण स्रोतों की कोई वास्तविक समय (real-time) जानकारी नहीं है, क्योंकि अब तक इस संबंध में कोई ठोस अध्ययन नहीं कराया गया।
सरकार ने ईंधन स्टेशनों पर न तो बेंजीन स्तर की निगरानी की और न ही वाष्प पुनर्प्राप्ति प्रणाली (Vapor Recovery System) की स्थापना सुनिश्चित की।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 24 निगरानी स्टेशनों में से 10 पर बेंजीन का स्तर स्वीकार्य सीमा से अधिक पाया गया। यह आंकड़ा राजधानी के पर्यावरणीय स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता का कारण है।





