Molitics Logo
होम "दिल्ली की हवा ज़हर बन चुकी है" – नितिन गडकरी की प्रदूषण पर बड़ी चेतावनी

"दिल्ली की हवा ज़हर बन चुकी है" – नितिन गडकरी की प्रदूषण पर बड़ी चेतावनी

गडकरी ने अपनी बात को एक मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से पुष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व किसी व्यक्ति की औसत उम्र को दस वर्ष तक कम |

"दिल्ली की हवा ज़हर बन चुकी है" – नितिन गडकरी की प्रदूषण पर बड़ी चेतावनी
फोटो: "दिल्ली की हवा ज़हर बन चुकी है" – नितिन गडकरी की प्रदूषण पर बड़ी चेतावनी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों का प्रदूषण स्तर इतना खतरनाक हो चुका है कि उन्हें "रेड ज़ोन" में रखा जाना चाहिए। गडकरी ने अपनी बात को एक मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से पुष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व किसी व्यक्ति की औसत उम्र को दस वर्ष तक कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "दिल्ली में प्रदूषण इतना ज्यादा है कि यदि आप केवल तीन दिन तक इस शहर में ठहरते हैं, तो संक्रमण की चपेट में आना लगभग तय है।" उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आने वाले समय में न केवल वायु, बल्कि जल प्रदूषण के खिलाफ भी ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने की जरूरत है।

क्या कहती है दिल्ली सरकार की रिपोर्ट?


वहीं दिल्ली सरकार ने हाल ही में राजधानी की वायु गुणवत्ता को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट विधानसभा में पेश की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की कई खामियों को उजागर किया गया है। यह रिपोर्ट पिछले दो वर्षों से लंबित 14 रिपोर्ट्स में से एक थी। रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दिल्ली में वाहनों से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयास बेहद कमजोर रहे हैं। कारों और अन्य वाहनों को दिए गए प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाणपत्रों में अनियमितताएं पाई गई हैं, वहीं वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। 

इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण उपायों के खराब क्रियान्वयन, रियल-टाइम डेटा की अनुपलब्धता, और सार्वजनिक परिवहन के अभाव जैसे मुद्दे भी उजागर हुए हैं। रिपोर्ट बताती है कि वाहनों से निकलने वाले धुएं को दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है, लेकिन इसके बावजूद निगरानी के लिए स्थापित स्टेशन CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि दिल्ली सरकार के पास प्रमुख प्रदूषण स्रोतों की कोई वास्तविक समय (real-time) जानकारी नहीं है, क्योंकि अब तक इस संबंध में कोई ठोस अध्ययन नहीं कराया गया। 

सरकार ने ईंधन स्टेशनों पर न तो बेंजीन स्तर की निगरानी की और न ही वाष्प पुनर्प्राप्ति प्रणाली (Vapor Recovery System) की स्थापना सुनिश्चित की। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 24 निगरानी स्टेशनों में से 10 पर बेंजीन का स्तर स्वीकार्य सीमा से अधिक पाया गया। यह आंकड़ा राजधानी के पर्यावरणीय स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता का कारण है।