जयराम रमेश का निशाना
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मोदी सरकार द्वारा नियुक्त 21वें विधि आयोग ने 31 अगस्त 2018 को ‘पारिवारिक कानून में सुधार’ पर 182 पन्नों का एक परामर्श पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें पैरा 1.15 में कहा गया था कि भारतीय संस्कृति की विविधता का जश्न मनाना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही समाज के विशिष्ट समूहों और कमजोर वर्गों के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इस आयोग ने समान नागरिक संहिता को तत्काल न तो आवश्यक माना और न ही वांछनीय। आयोग ने भेदभावपूर्ण कानूनों को खत्म करने की वकालत की थी और इसे लोकतंत्र की ताकत बताया था।”
जयराम रमेश ने आगे बताया कि 14 जून 2023 को 22वें विधि आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर समान नागरिक संहिता की जांच के अपने इरादे की घोषणा की थी। लेकिन 31 अगस्त 2024 को यह आयोग बिना अपनी रिपोर्ट सौंपे समाप्त हो गया। उन्होंने कहा, “3 सितंबर 2024 को 23वें विधि आयोग की घोषणा हुई, लेकिन इसकी वास्तविक संरचना अब तक अधिसूचित नहीं की गई है। मोदी सरकार विधि आयोग जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ इतनी लापरवाही कैसे बरत सकती है, खासकर ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर?”
इस बीच, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इसे जल्द लागू करने की घोषणा कर सकती है।
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