पत्र की जानकारी के अनुसार, सहारा एस्टेट के इन चार फ्लैट्स में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें से एक व्यक्ति पुलिस की टोपी कार के डैशबोर्ड पर रखकर खुद को पुलिसकर्मी बताता है, जबकि वह असल में पुलिसवाला नहीं होता। यह व्यक्ति पाकिस्तान और चीन के नागरिकों की मदद कर रहा है, जो अपनी अवैध गतिविधियां चला रहे हैं। इंजीनियर ने अपनी आशंका व्यक्त की है कि इन संदिग्ध व्यक्तियों ने अपराधों को अंजाम देने के लिए एक फिल्मी अंदाज अपनाया है, जिसमें वे खुद को छिपाकर दिन में आराम करते हैं और रात के समय इन फ्लैट्स में किसी न किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि इन घरों पर शाम के समय लोगों का आना-जाना बढ़ जाता है, जिससे स्थिति और भी संदिग्ध हो जाती है।
इस पत्र के बाद, डीएम ने इसे एसएसपी को भेजा, और एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी अभिनव त्यागी के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी है। एसपी सिटी ने पुष्टि करते हुए कहा कि पत्र में जिन संदिग्ध गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, उनकी जांच पूरी तरह से की जा रही है। यह पूरी जांच स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पत्र में उठाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
गौरतलब है कि इस पत्र के सामने आने से गोरखपुर में सुरक्षा और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जल्द ही इस पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने की योजना बनाई है।
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