बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिनमें कन्हैया कुमार और कुछ अन्य नेता भी शामिल थे।
इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उन्होंने राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और इसे एक जनविरोधी शासन करार दिया।
सचिन पायलट ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि राज्य के युवाओं को मूलभूत अधिकार नहीं मिल रहे हैं। उन्हें न रोजगार मिल रहा है और न ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार केवल घोषणाओं और आंकड़ों के सहारे अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिलकुल उलट है।
कन्हैया कुमार ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि बिहार के लाखों नौजवान दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ विरोध नहीं बल्कि एक आंदोलन है उन युवाओं के हक और सम्मान की बहाली के लिए, जो लंबे समय से नजरअंदाज किए जा रहे हैं।
पदयात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी थी और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। इस विरोध प्रदर्शन के कारण राजधानी पटना में यातायात भी प्रभावित हुआ।
इस घटना ने एक बार फिर राज्य की राजनीतिक फिजाओं में गर्मी ला दी है। विपक्ष जहां इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं प्रशासन इसे कानून व्यवस्था का मामला बता रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पदयात्रा का राज्य की सियासत और आगामी चुनावों पर कितना असर पड़ता है।





