स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले छह-सात वर्षों में इस इलाके में छह हत्याएं हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है। लोगों का आरोप है कि आरोपी प्रभावशाली और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हैं। कुछ के पास पार्षद और विधायक स्तर तक पहुंच है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया, “अगर कोई गिरफ्तार भी होता है तो कुछ ही दिनों में बाहर आ जाता है। हमें न्याय नहीं मिलता, केवल डर और खामोशी मिलती है।”
मृतक युवक कुणाल की मां का कहना है कि उनका बेटा किसी विवाद या झगड़े में शामिल नहीं था। उन्होंने बताया कि नवंबर महीने में गिहारा समाज के कुछ युवकों का सोहेल नामक लड़के से विवाद हुआ था, जिसमें सोहेल घायल हुआ था। कुणाल उस विवाद का हिस्सा नहीं था, लेकिन केवल गिहारा समाज से संबंध और दोस्ती की वजह से उसे निशाना बनाया गया।
वारदात की रात कुणाल अपनी दादी को अस्पताल छोड़ने के बाद दूध लेने निकला था, तभी घर से कुछ ही दूरी पर उस पर हमला कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हमला पूर्व नियोजित था। हत्या के विरोध में गिहारा समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए हैं। कुणाल के घर के बाहर प्रदर्शन किया जा रहा है और ‘हत्यारों को फांसी दो’ के नारे लगाए जा रहे हैं। लोगों ने दिल्ली सरकार और प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की मांग की है।





