पाकिस्तान के साथ कारोबारी संबंधों को लेकर बांग्लादेश ने फरवरी 2023 की शुरुआत में एक समझौता किया था, जिसके तहत 50 हजार टन पाकिस्तानी चावल का आयात मंजूर किया गया था। इस चावल का आयात पाकिस्तान के ट्रेडिंग कॉरपोरेशन से किया गया है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन का जहाज सरकारी माल के साथ बांग्लादेश के पोर्ट के लिए रवाना किया है। यह घटनाक्रम समुद्री व्यापार के मामले में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान का एक हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान था, जिसे 1971 में अलग होकर बांग्लादेश के रूप में स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित किया गया। बांग्लादेश का गठन बांग्ला भाषा के नाम पर हुआ था, लेकिन शेख हसीना की सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव फिर से मजबूत हो रहा है।
बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पार्टी, जो पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंधों की हिमायती रही है, अब फिर से अपनी ताकत बढ़ा रही है। यह माना जा रहा है कि बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भी इन इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव में हैं, जिससे बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक व्यापार की शुरुआत हो पाई है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच चावल के व्यापार के संबंध में हुई डील के तहत पहले चरण में 25 हजार टन चावल का आयात किया जाएगा, और अगले चरण का आयात मार्च 2023 की शुरुआत में होगा।
पाकिस्तान के साथ बढ़ते हुए कारोबारी रिश्तों के कारण यह आशंका जताई जा रही है कि बांग्लादेश और भारत के बीच व्यापार कमजोर हो सकता है, क्योंकि बांग्लादेश अब पाकिस्तान से व्यापार बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है। बांग्लादेश लंबे समय से भारत से बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थों का आयात करता आया है, लेकिन अब पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंधों से यह संभावना बढ़ रही है कि पाकिस्तान से आने वाले माल की खेप भारत से कम हो सकती है।
शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात भी कर चुके हैं और उनकी पाकिस्तान दौरे की योजना भी बन रही है। यह बांग्लादेश के लिए एक नया युग हो सकता है, जहां वह पाकिस्तान के साथ संबंधों को और अधिक गहरा करता है, जबकि भारत से उसकी व्यापारिक साझेदारी में कमी आ सकती है।
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