रहमान ने कहा कि इस योजना के तहत किए गए विकास कार्यों से न केवल पूजा स्थलों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों को भी अपनी धार्मिक आज़ादी और भक्ति में बेहतर सुविधा मिलेगी।
रहमान ने यह भी बताया कि इस वर्ष ईटीपीबी को एक अरब रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो एक सकारात्मक संकेत है कि ट्रस्ट की गतिविधियाँ सफल हो रही हैं। बैठक में देशभर के हिंदू और सिख समुदाय के सदस्य, सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिनिधि, और अन्य हितधारक उपस्थित थे, जिन्होंने योजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और अपनी सहमति दी।
ईटीपीबी के सचिव फरीद इकबाल ने इस अवसर पर कहा कि विभाग के राजस्व को बढ़ाने के लिए अब नई रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग अब अपनी लंबे समय से अनुपयोगी जमीनों को विकास कार्यों के लिए प्रस्तुत कर रहा है, जिससे विभाग को आय में कई गुना वृद्धि की उम्मीद है। यह कदम ट्रस्ट की संपत्तियों का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में एक अहम कदम होगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न मंदिरों और गुरुद्वारों के विकास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए एक परियोजना निदेशक की नियुक्ति की जाएगी।
इसके अलावा, 'परियोजना प्रबंधन इकाई करतारपुर कॉरिडोर' के संचालन कार्यों के लिए भी एक समर्पित टीम गठित की जाएगी, ताकि इस महत्वपूर्ण परियोजना को पूरी तरह से सुचारू रूप से चलाया जा सके। इस प्रकार, पाकिस्तान सरकार अपने अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की बेहतर देखभाल और संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है, जो न केवल धार्मिक समरसता को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान करेगा।
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