राजनीतिक टकराव में नया मोड़
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी के बीच छिड़ी जुबानी जंग एक बार फिर ताजा रूप ले चुकी है। सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में 'जनता दरबार' के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने सीधे अभिषेक बनर्जी के गढ़ डायमंड हार्बर में जाकर उन्हें 2029 के लोकसभा चुनाव में हराने की खुली चुनौती दी।
अधिकारी ने कहा, "अगर अभिषेक में हिम्मत है, तो वह 2029 में वही सीट से चुनाव लड़ें, जहां इस बार उनकी जमानत तक जब्त कर दी जाएगी।"
2024 के चुनाव की चर्चा
शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी के हालिया आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 2024 के चुनाव में वह बनर्जी को कम से कम एक वोट के अंतर से हराने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "भले ही सीपीआईएम (CPI-M) उनका समर्थन करे, फिर भी आपकी जमानत जब्त हो जाएगी।"
अभी हाल ही में अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर सीट से करीब 7 लाख वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
अभिषेक के बयान पर तंज
अभिषेक बनर्जी के पुलिस प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बनर्जी का "सोडियम-पोटेशियम असंतुलन" बिगड़ गया है, जिसके कारण वे ऐसे बेतुके बयान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अभिषेक को इलाज की आवश्यकता है, तो उनकी सरकार तुरंत एनओसी जारी करने के लिए तैयार है।
यह विवाद तब और बढ़ा जब अभिषेक ने संवाददाताओं से कहा कि कुछ पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री के इशारे पर तृणमूल कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर रहे हैं।
ममता बनर्जी पर सीधा हमला
सॉल्ट लेक के बाद बारुईपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने बिना नाम लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण 24 परगना की जनता अब वास्तविक अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता का अनुभव कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "बड़ा चोर कब जाएगा, यह समय का चुनाव करने पर निर्भर करता है।" उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम किया, उनमें से एक पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
टीएमसी और वाममोर्चा की निकटता पर सवाल
सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस और वाममोर्चा (CPI-M) के बीच बढ़ती नजदीकियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस टीएमसी का गठन बंगाल को सीपीएम के अत्याचारों से बचाने के लिए हुआ था, वही आज दिल्ली की राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए वामपंथी दलों से साठगांठ कर रही है।
राज्य में सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।





