मानसून सत्र: सेना ने तुरंत जवाबी रणनीति बनाई- राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने बताया कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने तुरंत जवाबी रणनीति बनाई।
उन्होंने कहा, “हमारे सैनिकों ने एक साथ 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। ये ठिकाने पाकिस्तान में स्थित थे और आतंकियों के प्रशिक्षण, योजना और संचालन के केंद्र थे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों के आतंकवादी, ट्रेनर और सहयोगी मारे गए। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सैन्य योजना, इंटेलिजेंस और अंतर-सेना समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण था। यह कार्रवाई दर्शाती है कि हमारी सेना हर मोर्चे पर तैयार है और किसी भी आतंकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
दबाव में नहीं, लक्ष्य पूरे होने पर रोका ऑपरेशन- राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत ने यह सैन्य कार्रवाई किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण नहीं, बल्कि अपने तय लक्ष्यों की सफल पूर्ति के बाद रोकी थी। राजनाथ सिंह ने कहा, “यह मानना कि भारत ने किसी दबाव में ऑपरेशन रोका, सरासर गलत है। हमने यह कार्रवाई इसलिए रोकी क्योंकि हमने अपने सभी टार्गेट पूरी तरह हासिल कर लिए थे।”
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य युद्ध छेड़ना नहीं था, बल्कि पाकिस्तान में वर्षों से पल रही 'आतंकी नर्सरियों' को खत्म करना था।
“हमारी सेनाओं ने सिर्फ उन्हें निशाना बनाया जो भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन दे रहे थे और सक्रिय रूप से इसमें शामिल थे।”
राजनाथ सिंह ने खुलासा किया कि जब 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की एयरफील्ड पर करारा प्रहार किया, तो पाकिस्तान ने तुरंत पीछे हटने का संकेत दिया।
“पाकिस्तान के डीजीएमओ ने हमारे डीजीएमओ से संपर्क कर कहा—‘महाराज, अब रोकिए’। हमने इसे केवल ‘पॉज’ किया है, यदि पाकिस्तान ने फिर कोई हरकत की तो यह ऑपरेशन दोबारा शुरू होगा।” रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की पराजय केवल सैन्य नहीं थी, बल्कि यह उसके मनोबल की भी पूरी तरह हार थी।
“ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना का पराक्रम 140 करोड़ भारतीयों ने देखा। यह कार्रवाई रणनीति, संयम और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक थी।”





