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महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026, सख्त नियम लागू

महाराष्ट्र का धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026 लाया सख्त नियम लागू, धर्मांतरण से पहले 60 दिन की सूचना और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी।

महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026, सख्त नियम लागू
फोटो: Devendra Fadnavis government bill, Maharashtra Anti Conversion Bill 2026
देवेंद्र फडणवीस सरकार का विधेयक: महाराष्ट्र विधानसभा में हाल ही में ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ पेश किया गया है, जो राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े नियमों को पहले से भी अधिक सख्त बनाता है। बिल का मुख्य उद्देश्य अवैध धर्मांतरण को रोकना और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

इस बिल के तहत यदि कोई व्यक्ति बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए धर्म बदलता है, तो यह अवैध माना जाएगा। धर्म परिवर्तन से पहले अब कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित रूप में सूचना देना अनिवार्य होगा। इस सूचना में व्यक्ति का नाम, उम्र, पता, वर्तमान धर्म और अपनाने वाला नया धर्म दर्ज करना होगा। प्रशासन यह जांच भी कर सकता है कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो रहा है या किसी दबाव, धोखे या लालच के तहत किया गया है।

महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026

बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026 के तहत, अवैध धर्म परिवर्तन के आधार पर हुई शादी से पैदा हुए बच्चों का धर्म उनकी मां के मूल धर्म के रूप में माना जाएगा। इसका मतलब है कि बच्चे का धर्म मां द्वारा शादी से पहले अपनाया गया धर्म होगा।

साथ ही, ऐसे बच्चों को माता-पिता दोनों की संपत्ति में हिस्सेदारी का अधिकार मिलेगा। उनका भरण-पोषण करने का अधिकार भी सुरक्षित रहेगा। आम तौर पर, बच्चों की कस्टडी मां के पास रहेगी जब तक कि अदालत कोई अलग फैसला न दे। 

कड़ी सजा का प्रावधान

धर्म परिवर्तन के नियमों का पालन न करने पर महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी विधेयक 2026 के तहत, कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि मामला महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति या जनजाति से जुड़ा हो, तो जुर्माना बढ़कर 5 लाख रुपये तक हो सकता है।

यदि दो या अधिक लोगों ने एक साथ धर्म परिवर्तन किया, तो इसे ‘मास कन्वर्ज़न’ माना जाएगा और सजा और भी कड़ी होगी। इस अपराध के दोबारा होने पर 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

शिकायत और सुरक्षा प्रावधान 

धर्म परिवर्तन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का अधिकार अब व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदारों को होगा। पुलिस के लिए ऐसी शिकायत दर्ज करना अनिवार्य होगा।

बिल में यह भी प्रावधान रखा गया हैकि जबरन धर्म परिवर्तन के शिकार व्यक्तियों के पुनर्वास और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि उनका जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से आगे बढ़ सके। इस विधेयक के आने के बाद महाराष्ट्र में धर्मांतरण की प्रक्रिया अब पहले से अधिक पारदर्शी और नियंत्रित होगी। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया का पालन इस बिल के मुख्य केंद्र में है।