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सिद्धारमैया का राजनीतिक भविष्य: आखिरी सांस तक सक्रिय रहेंगे

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने वरुणा की जनता से अपील की कि वे अपने बेटे यतींद्र को भी उतना ही समर्थन दें, आखिरी सांस तक सिद्धारमैया का राजनीतिक भविष्य |

सिद्धारमैया का राजनीतिक भविष्य: आखिरी सांस तक सक्रिय रहेंगे
फोटो: Siddaramaiah son Yathindra, Siddaramaiah political future
सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र: कर्नाटक के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने शुक्रवार को एक भावनात्मक बयान देते हुए कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक राजनीति में सक्रिय रहेंगे और जनता की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोगों से विशेष अनुरोध किया कि वे उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को उसी तरह राजनीतिक समर्थन दें, जैसे उन्होंने स्वयं सिद्धारमैया को किया। 

सीएम ने कहा, मेरे राजनीतिक जीवन में जीत और हार दोनों अनुभव हुए हैं। मैंने चार चुनावों में हार और सात चुनावों में जीत का सामना किया है। राजनीति में यह सामान्य है, लेकिन मैंने कभी जनता की सेवा करना नहीं छोड़ा। आज भी और आगे भी मैं जनता की भलाई के लिए पूरी मेहनत करता रहूंगा।

सिद्धारमैया का राजनीतिक भविष्य

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के यह बयान ऐसे समय में आए हैं जब कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर उनके और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष की चर्चाएँ जारी हैं। 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद दोनों के बीच कथित सत्ता साझा करने का समझौता बताया जाता रहा है।

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि जनता के विश्वास पर भरोसा रखते हुए वे अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखेंगे, और आखिरी सांस तक सिद्धारमैया का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहेगा।

राजनीतिक जीवन की झलक

सीएम ने अपने राजनीतिक जीवन की यादें साझा करते हुए कहा कि उन्हें वरुणा और चामुंडेश्वरी निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं का निरंतर समर्थन मिला है। उन्होंने 2006 के उपचुनावों का भी जिक्र किया और कहा कि केम्पेगौडनहुंडी और होसहूंडी जैसे गांवों के लोगों ने उन्हें हमेशा मजबूत समर्थन दिया। और यही समर्थन आखिरी सांस तक सिद्धारमैया का राजनीतिक भविष्य सुनिश्चित करेगा।

सिद्धारमैया ने बताया कि इन क्षेत्रों के मतदाताओं के सहयोग के बिना वे दो बार मुख्यमंत्री बनने, दो बार विपक्ष के नेता के रूप में कार्य करने और 17 बार राज्य का बजट पेश करने में सक्षम नहीं होते।

धर्म, भक्ति और मानवता पर संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने युवावस्था के मंदिर उत्सवों और धार्मिक अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति ईश्वर के प्रति सम्मान और मानवता की सेवा से जुड़ी होती है। ईश्वर केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हर जगह मौजूद हैं। प्रार्थना तभी स्वीकार होती है जब उसमें दूसरों की भलाई और नफरत से परहेज़ शामिल हो, उन्होंने कहा।

सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी धर्म प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देते हैं। उनके साथ इस अवसर पर उनके बेटे यतींद्र और पूर्व विधायक एम.के. सोमशेखर भी मौजूद थे। इस तरह सिद्धारमैया ने न केवल अपने राजनीतिक अनुभव साझा किए, बल्कि अपने बेटे के लिए जनता से समर्थन की अपील भी की और धर्म व मानवता पर अपनी स्पष्ट राय रखी।

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