Molitics Logo
होम कानून Supreme Court ने तमिलनाडु गवर्नर आर एन रवि को ‘वापस’ बुलाने की याचिका खारिज की, कहा- ‘संविधान से बंधे हैं!’
कानून

Supreme Court ने तमिलनाडु गवर्नर आर एन रवि को ‘वापस’ बुलाने की याचिका खारिज की, कहा- ‘संविधान से बंधे हैं!’

Supreme Court की पीठ, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस संजीव खन्ना कर रहे थे, ने सोमवार (3 फरवरी) को तमिलनाडु के गवर्नर आर एन रवि को तुरंत वापस बुलाने की मांग करने |

Supreme Court ने तमिलनाडु गवर्नर आर एन रवि को ‘वापस’ बुलाने की याचिका खारिज की, कहा- ‘संविधान से बंधे हैं!’
फोटो: Supreme Court, Tamil Nadu Governor, RN Ravi
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस संजीव खन्ना कर रहे थे, ने सोमवार (3 फरवरी) को तमिलनाडु के गवर्नर आर एन रवि को तुरंत वापस बुलाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि गवर्नर रवि ने 6 जनवरी को तमिलनाडु विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही विधानसभा से बाहर चले गए थे, जो राज्य के लोगों का अपमान करने जैसा था। याचिकाकर्ता ने इस घटना के आधार पर गवर्नर को तुरंत वापस बुलाने की मांग की थी और राष्ट्रपति के सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई करने की अपील की थी। 

 सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिका में तथ्यात्मक गलतियां थीं और वह संविधान के तहत काम कर रहे हैं, इसलिए ऐसे मामलों में कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, “हम संविधान से बंधे हैं और इस तरह की प्रार्थनाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता। याचिका गलत तरीके से दायर की गई है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।” यह विवाद तब शुरू हुआ जब 6 जनवरी को गवर्नर रवि ने तमिलनाडु विधानसभा में पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही विधानसभा छोड़ दिया था, जिससे राज्य में विवाद उत्पन्न हुआ था। इस कृत्य पर मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने गवर्नर की कड़ी आलोचना की थी और इसे ‘बचकाना हरकत’ बताया था। उन्होंने गवर्नर पर लगातार राज्य के लोगों का अपमान करने का आरोप लगाया था।

 इसके बाद, सत्तारूढ़ दल डीएमके ने राज्य गान "माता तमिल का आह्वान" और राज्य के अपमान के विरोध में राज्यव्यापी प्रदर्शन आयोजित किए। वहीं, गवर्नर रवि ने अपने बचाव में कहा था कि उन्होंने हमेशा राज्य गान "तमिल थाई वझथु" की गरिमा बनाए रखी है और हर समारोह में इसे पूरी निष्ठा के साथ गाते हैं। यह मामला तब और बढ़ गया था जब डीएमके और राजभवन के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई थी, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी अंतिम टिप्पणी देते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

Read This Also:- सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को लताड़ा, पूछा – विदेशियों को कब तक हिरासत में रखेंगे?