Molitics Logo
होम कानून हत्या का दोषी ठहराया, पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा निर्दोष, 15 साल बाद मिला इंसाफ?
कानून

हत्या का दोषी ठहराया, पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा निर्दोष, 15 साल बाद मिला इंसाफ?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 4 जून 2025 को एक 15 साल पुराने हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाया। जिस आरोपी को निचली अदालत और हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था |

हत्या का दोषी ठहराया, पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा निर्दोष, 15 साल बाद मिला इंसाफ?
फोटो: हत्या का दोषी ठहराया, पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा निर्दोष, 15 साल बाद मिला इंसाफ?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 4 जून 2025 को एक 15 साल पुराने हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाया। जिस आरोपी को निचली अदालत और हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या का ठोस मकसद साबित करने में असफल रहा। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वैभव नामक युवक को केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं था। अदालत ने कहा, "निचली अदालत और हाईकोर्ट ने हत्या के पीछे का कोई ठोस मकसद स्थापित किए बिना ही दोषसिद्धि दी थी।"

यह मामला सितंबर 2010 का है, जब महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित बागला होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के दो छात्र वैभव और मंगेश कॉलेज से एक साथ निकले थे। दोनों अक्सर साथ आते-जाते थे। 16 सितंबर को वे कॉलेज से मंगेश के स्कूटर पर निकले, एक चाय स्टॉल पर रुके और फिर वैभव के घर चले गए। उसी शाम मंगेश घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। अगले दिन उसका शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने वैभव को मुख्य आरोपी बनाया, क्योंकि वह मंगेश के साथ आखिरी बार देखा गया था।

पुलिस ने अदालत को बताया कि वैभव ने रिवॉल्वर से मंगेश की हत्या कर दी थी। वहीं, वैभव ने दावा किया कि मंगेश ने गलती से खुद को गोली मार ली थी। उसने स्वीकार किया कि डर के कारण उसने घटनास्थल को साफ किया और शव को हटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हत्या के पीछे कोई भी ठोस और सुसंगत मकसद अभियोजन द्वारा साबित नहीं किया गया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और शस्त्र अधिनियम के अंतर्गत वैभव की सजा रद्द कर दी। हालांकि, पीठ ने साक्ष्य मिटाने के आरोप में IPC की धारा 201 के तहत उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा और उसे दी गई सजा भी मान्य की, जो वह पहले ही काट चुका है।