कुमार विश्वास ने अपनी सफाई में कहा कि वह गाजियाबाद और नोएडा में रहते हैं, जहां अधिकांश घरों के नाम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से प्रेरित होते हैं, जैसे रामायण, साकेत, गोकुल, श्रीधाम आदि। उनका कहना था कि भारत में सांस्कृतिक चेतना को लेकर एक साजिश चल रही है, जिससे लोगों में वितृष्णा पैदा की जा रही है। उन्होंने इस पर जोर देते हुए कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ 'हारमनी' और 'प्यारी' बातें करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए एक गंभीर संवाद और समझ की आवश्यकता है।
एबीपी न्यूज के एक कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने कहा, "जहां मैं रहता हूं, गाजियाबाद और नोएडा में हर दस घरों में से एक का नाम रामायण है, दूसरे का साकेत, किसी का वृंदावन, गोकुल, श्रीधाम है। यदि आप इसे किसी विशेष व्यक्ति से जोड़कर विवाद खड़ा करना चाहते हैं, तो मैं इसके लिए जिम्मेदार नहीं हूं। यह आपका राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है, लेकिन मेरी बात का इससे कोई लेना-देना नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को कमजोर करने की साजिश के खिलाफ आवाज उठाना था।
कुमार विश्वास ने यह भी कहा था कि उन्हें लगता है कि बच्चों को रामायण सुनाना और गीता पढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो आपका घर भले ही रामायण के नाम से जाना जाए, लेकिन फिर भी आपके घर की 'श्रीलक्ष्मी' को कोई और उठाकर ले जाएगा।" इस बयान को खासकर सोनाक्षी सिन्हा और उनके पिता शत्रुघ्न सिन्हा से जोड़ा गया, क्योंकि उनके घर का नाम रामायण है और सोनाक्षी ने हाल ही में जहीर इकबाल से शादी की है। कुमार विश्वास की इस टिप्पणी पर जमकर आलोचना हो रही है, और कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
कुमार विश्वास ने यह भी कहा कि वह जैसे लोग हैं, जिनका कोई वोट बैंक नहीं है, वे सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करते हैं, जबकि राजनीति के लिए काम करने वाले लोग अपनी चालें चलते रहते हैं। उनका मानना था कि भारत की सांस्कृतिक धारा को बनाए रखने के लिए लोगों को अपनी समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज में भेदभाव के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।





