गुजरात की पांच ऐसी पार्टियों पर विशेष ध्यान- ADR रिपोर्ट
रिपोर्ट में गुजरात की पांच ऐसी पार्टियों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में तीन चुनावों में मिलकर केवल 22,000 वोट हासिल किए, लेकिन फिर भी उनकी कुल आय ₹2,316 करोड़ तक पहुंच गई। इनमें से एक पार्टी ने तो एक वर्ष में ही ₹1,158 करोड़ की आय दर्ज की। ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि कई पार्टियों का पंजीकरण केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि वित्तीय गतिविधियों के लिए किया गया है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2019 से 2024 के बीच इन पांच पार्टियों ने केवल 17 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, लेकिन एक भी जीत नहीं मिली। सबसे खास बात यह है कि इनमें से चार पार्टियां 2018 के बाद पंजीकृत हुई थीं, जिससे इनके अचानक बढ़े चंदे और कमाई पर संदेह और भी गहरा हो जाता है।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में सबसे अधिक पंजीकृत RUPP हैं, लेकिन इन राज्यों की अधिकांश पार्टियों ने अपनी आय-व्यय की कोई जानकारी नहीं दी है। उदाहरण के तौर पर, यूपी में 744 में से केवल 71 पार्टियों ने विवरण साझा किया है, जबकि दिल्ली की 240 में से 168 पार्टियों ने कोई जानकारी नहीं दी।
क्य है एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR)?
इस रिपोर्ट की विश्वसनीयता और गहराई का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इसे तैयार करने वाला संगठन ADR, भारतीय लोकतंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वर्षों से काम कर रहा है। ADR की स्थापना 1999 में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद के कुछ प्रोफेसरों और पूर्व छात्रों ने मिलकर की थी। यह संगठन राजनीतिक दलों और नेताओं की पृष्ठभूमि, संपत्ति, चंदा, आपराधिक मामलों और चुनावी व्यय जैसे मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित करता है।





