सरकार से सवाल पूछने की कीमत चुका रहे हैं स्वतंत्र पत्रकार?
पंजाब में पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सरकारी विज्ञापन और सत्ता से सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर दबाव को लेकर बहस तेज हो गई है। पत्रकार रतन धालीवाल ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीरें इस्तेमाल करने के कारण उनके फेसबुक पेज पर 20 से अधिक कॉपीराइट शिकायतें की गईं, जिसके बाद उनका पेज बंद हो गया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में सरकार के पक्ष में काम नहीं करने वाले कुछ पत्रकारों को निशाना बनाया गया। हालांकि, ये आरोप इंटरव्यू में धालीवाल के बयानों पर आधारित हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई है।
भगवंत मान की तस्वीरों पर कॉपीराइट का विवाद
रतन धालीवाल के मुताबिक, जनवरी 2026 में उनके फेसबुक पेज पर लगातार कॉपीराइट शिकायतें आने लगीं। उन्होंने बताया कि 8 से 10 जनवरी के आसपास यह सिलसिला शुरू हुआ और धीरे-धीरे 20 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। उनके अनुसार, शिकायतों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीरों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल शामिल था।
धालीवाल ने कहा कि उन्होंने पंजाब की लैंड पूलिंग नीति से जुड़ी जानकारी और अकाल तख्त से संबंधित एक प्रेस विज्ञप्ति जैसी सामग्री भी साझा की थी। उनके मुताबिक, कुछ ऐसी पोस्ट पर भी कॉपीराइट शिकायतें आईं, जिनका उद्देश्य केवल समाचार या सार्वजनिक जानकारी देना था। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के अस्पताल में भर्ती होने के दौरान जारी मेडिकल ब्रीफिंग से जुड़ी खबर में तस्वीर इस्तेमाल करने पर भी शिकायत की गई।
धालीवाल का दावा है कि आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के नाम से शिकायतें भेजी गईं। उन्होंने कहा कि अन्य पत्रकारों के पेज और चैनल भी इसी तरह की कार्रवाई से प्रभावित हुए। बाद में मेटा से सवाल उठाए जाने के बाद कुछ पेज बहाल हो गए। हालांकि, कॉपीराइट शिकायतों के आधार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
तस्वीरों को काला करके जताया विरोध
धालीवाल ने बताया कि कॉपीराइट विवाद के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री की तस्वीरों को धुंधला या काला करके प्रकाशित करना शुरू कर दिया। उन्होंने इसे विरोध का रचनात्मक तरीका बताया और कहा कि पेज बहाल होने के बाद भी वह ऐसा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर शिकायतकर्ताओं की पहचान करने और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। धालीवाल के अनुसार, उन्हें दो-तीन महीने बाद जवाब मिला, जिसमें संबंधित लोगों पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, उनके मुताबिक, इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
दबाव, छापेमारी और राजनीतिक आरोप
इंटरव्यू में धालीवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले भी दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनके घर पर बिजली विभाग की छापेमारी हुई थी और उनके घर के बाहर नोटिस लगाए गए थे। उनके मुताबिक, एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भी उनका नाम लेकर उनकी रिपोर्टिंग का जिक्र किया था।
धालीवाल ने कहा कि उन्हें राजनीतिक दलों की ओर से अपने हिसाब से काम करने के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने उन्हें स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ पत्रकारों को विज्ञापन, निजी लाभ और अन्य सुविधाओं के कारण सरकार की आलोचना करने से परहेज रहता है। पंजाब के लगभग 95 प्रतिशत चैनलों के सरकार के पक्ष में होने का उनका दावा भी इंटरव्यू में सामने आया, लेकिन इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए आम आदमी पार्टी मीडिया की स्वतंत्रता की बात करती थी, लेकिन पंजाब में सत्ता में आने के बाद उसका रवैया अलग दिखाई देता है। यह धालीवाल का राजनीतिक आकलन है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष।
पंजाब में नशे और स्वास्थ्य संकट पर भी उठाए सवाल
बातचीत के दौरान धालीवाल ने पंजाब में नशे की समस्या, युवाओं की स्थिति और पर्यावरण प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने एक ऐसे युवक का उल्लेख किया, जिसने कथित तौर पर नशे की लत छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में सवाल उठाया था। धालीवाल ने सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली जीभ के नीचे रखने वाली दवा पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि इससे नशे की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती।
उन्होंने पंजाब के कुछ इलाकों में कैंसर, दूषित पानी और औद्योगिक अपशिष्ट के प्रभाव का जिक्र किया। बठिंडा जेल में कथित तौर पर लगभग 2,000 कैदियों के लिए केवल एक वाटर कूलर होने की बात भी उन्होंने कही। इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
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