संसद की बैठकें अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 64 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक सत्र का औपचारिक समापन यानी प्रोरोगेशन नहीं किया है। इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तीखे सवाल उठाए हैं। खड़गे की मुख्य चिंता यह है कि क्या सरकार बिना व्यापक चर्चा के पिछले सत्र के जरिए ही डीलिमिटेशन (परिसीमन) और महिला आरक्षण से जुड़ा कोई बड़ा विधेयक चुपचाप पारित कराना चाहती है।
अप्रैल 2026 में सरकार लोकसभा की सदस्य संख्या 850 तक बढ़ाने, परिसीमन करने और महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े तीन अहम बिल लेकर आई थी। हालांकि, संविधान संशोधन बिल को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) नहीं मिल पाया था, क्योंकि उसे 298 वोट ही मिले थे और 230 सदस्यों ने विरोध किया था। इसके बाद से ही यह मामला ठंडे बस्ते में था, लेकिन सत्र खुला रहने के कारण विपक्ष को आशंका है कि सरकार इन प्रस्तावों को दोबारा ला सकती है।
विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि यदि जनसंख्या के आधार पर नया परिसीमन किया जाता है, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर काम किया है, विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों, उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी और राजनीतिक ताकत घट सकती है। हालांकि, सरकार का दावा है कि सभी राज्यों की सीटों में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी ताकि किसी का हिस्सा प्रभावित न हो, लेकिन इस संबंध में कोई लिखित गारंटी न होने के कारण अविश्वास की स्थिति बनी हुई है।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कानून को परिसीमन और सीटों के बंटवारे के साथ जोड़कर पेश करने के कारण ही आम सहमति नहीं बन पा रही है। विपक्ष की मांग है कि सरकार नया प्रस्ताव सामने रखे, राज्यवार हिस्सेदारी का पूरा खाका स्पष्ट करे और सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक सर्वदलीय बैठक बुलाकर पर्याप्त समय दे।





