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कनॉट प्लेस में 101 दिन के प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित, दुकानदारों और प्रदर्शनकारियों में अलग-अलग राय

दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने का दावा। दुकानदारों और प्रदर्शनकारियों के बीच जंतर-मंतर को लेकर मतभेद।

कनॉट प्लेस में 101 दिन के प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित, दुकानदारों और प्रदर्शनकारियों में अलग-अलग राय
फोटो: Delhi Protest | Connaught Place | Jantar Mantar | SIR Voter List | Traders Business Loss

दिल्ली के कनॉट प्लेस और पालिका बाजार के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों का असर स्थानीय कारोबार पर पड़ने का दावा दुकानदार कर रहे हैं। किताबों, कपड़ों और परफ्यूम की बिक्री करने वाले व्यापारियों का कहना है कि लगातार प्रदर्शन, पुलिस की तैनाती और ग्राहकों की कम आवाजाही से उनकी कमाई प्रभावित हुई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी मांग केवल निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की है।

 

दुकानदारों ने बताई आर्थिक परेशानी

कनॉट प्लेस में पिछले 38 वर्षों से किताबें बेच रहे एक दुकानदार ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान उनका कारोबार लगभग ठप हो गया। उनके मुताबिक, बिक्री में 60 से 80 प्रतिशत तक गिरावट आई। पालिका बाजार के पास परफ्यूम बेचने वाली एक महिला ने कहा कि पहले वह प्रतिदिन लगभग 700 से 1,500 रुपये तक कमा लेती थीं, लेकिन अब कई बार पूरे दिन एक भी बिक्री नहीं होती।

गारमेंट्स की दुकान पर काम करने वाले अंशुल ने बताया कि दशहरा और दिवाली के दौरान बाजार में आमतौर पर काफी भीड़ रहती है, लेकिन इस बार ग्राहकों की संख्या बेहद कम दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बाजार के कारोबार को बार-बार व्यवधान का सामना करना पड़ा है। दुकानदारों ने मांग की कि प्रदर्शन ऐसे तरीके से हों, जिससे व्यापार, यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।

कुछ दुकानदारों ने प्रदर्शनकारियों के लिए वैकल्पिक स्थलों का समर्थन किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रामलीला मैदान जैसे स्थानों पर प्रदर्शन के लिए कथित तौर पर डेढ़ लाख रुपये तक शुल्क देना पड़ सकता है, जबकि बुराड़ी जैसे दूरस्थ स्थानों पर पहुंचना भी मुश्किल है।

 

वोटर लिस्ट और जंतर-मंतर को लेकर विवाद

प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं और चुनाव आयोग को इस पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने 13 करोड़ नाम हटाए जाने से जुड़े दावों और प्रभावित लोगों की स्थिति की निष्पक्ष जांच की मांग की।

कुछ दुकानदारों ने इसके विपरीत तर्क दिया कि मतदाता सूची में नाम हटने के मामलों में दस्तावेजों की जांच जरूरी है। बातचीत के दौरान घुसपैठियों से जुड़े राजनीतिक दावों पर भी असहमति सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने सवाल किया कि बिना ठोस प्रमाण किसी को विदेशी या घुसपैठिया कैसे कहा जा सकता है।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य व्यापारियों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। उन्होंने सरकार से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विचार करने की अपील की।

इस पूरे विवाद में दुकानदारों की आजीविका और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन का सवाल प्रमुखता से उभरा है। जहां व्यापारी सामान्य कारोबार बहाल करने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के लिए जंतर-मंतर को अपना निर्धारित स्थल बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।

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