इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।
राजनीतिक रिश्तों में भी सुधार हो रहा है, और इस दिशा में पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार जल्द ही बांग्लादेश यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2008 के बाद से किसी मंत्री स्तर के पाकिस्तानी अधिकारी ने बांग्लादेश का दौरा नहीं किया था। शेख हसीना की सरकार के दौरान पाकिस्तान को अधिक तवज्जो नहीं दी जाती थी, और भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते काफी अच्छे थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है, और बांग्लादेश पाकिस्तान के करीब आ रहा है।
इसके अलावा, बांग्लादेश के अधिकारियों ने पूर्वोत्तर भारत में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों के साथ संपर्क किया है, जो भारत के लिए एक चिंता का विषय बन सकता है। खासतौर पर भारत को यह चिंता है कि पाकिस्तानी एजेंसी पूर्वोत्तर भारत में फिर से उग्रवाद और अलगाववाद की घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है, जैसा कि पहले भी देखा गया था।
पाकिस्तान की एजेंसी ने पहले भी पूर्वोत्तर में उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की थी, और अब फिर से इस तरह की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।
पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री के बांग्लादेश दौरे से पहले बांग्लादेश के सलाहकार मोहम्मद तौहिद हुसैन और इशाक डार की जेद्दा में मुलाकात हुई थी। पाकिस्तानी उच्चायोग ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताया है और कहा कि यह बैठक अच्छे माहौल में हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों को मजबूत करने और विभिन्न मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। यह मुलाकात इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक के बाद हुई, जो दोनों देशों के लिए एक और महत्वपूर्ण मंच है।
बीते साल अगस्त में शेख हसीना के सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामिक ताकतें और भी ताकतवर हो गई हैं। इन ताकतों का मानना है कि बांग्लादेश को भारत के बजाय पाकिस्तान के करीब जाना चाहिए, और वे पाकिस्तान से अपने रिश्तों को इस्लामिक विचारधारा के आधार पर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह कट्टरपंथी समूह 1971 में बांग्लादेश के निर्माण में भारत के योगदान को नकारते हैं और भारत को बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका का श्रेय नहीं देना चाहते। इसके बजाय, वे पाकिस्तान से भाईचारा बढ़ाने के पक्षधर हैं, और इसे धार्मिक कारणों से बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं।
इस स्थिति से भारत के लिए चिंता बढ़ रही है, क्योंकि पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में सुधार भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवाद और अलगाववाद को बढ़ावा दे सकता है। अगर यह बदलाव जारी रहता है, तो भारत को अपनी सुरक्षा और विदेशी नीति पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता होगी।
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