नालंदा में हुई तबाही सबसे भयावह रही। मानपुर के नगमा गांव में एक मंदिर पर पेड़ गिरने से छह लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा बिहारशरीफ के चांदपुर में दो, नालंदा खंडहर, सिलाव और गिरिचक में एक-एक, तथा इस्लामपुर में पुल गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। मसाही के दिघवां गांव में निर्माण स्थल पर ईंट गिरने से एक महिला की मृत्यु हो गई।
गया में दीवार गिरने से एक बच्चे की मौत हुई, जबकि गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में पेड़ गिरने से एक-एक महिला और बुजुर्ग की जान चली गई। मौसम की मार से सिर्फ इन जिलों तक ही नुकसान सीमित नहीं रहा।
वज्रपात की घटनाएं भी पूरे राज्य में देखने को मिलीं। सीवान में चार, जमुई में तीन, सहरसा, अररिया और सारण में दो-दो, तथा पटना, जहानाबाद, भोजपुर, दरभंगा, अरवल, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, मुंगेर, कटिहार और भागलपुर में एक-एक व्यक्ति की जान वज्रपात की वजह से चली गई।
कुल मिलाकर राज्य के 24 जिलों में इस आपदा ने तबाही मचाई। ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़, खंभे, मकान, दीवारें गिर गईं, और खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं। आमजन के साथ-साथ किसानों को भी भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्रशासनिक टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच चुकी हैं और बुनियादी सुविधाएं बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य में रविवार को भी मौसम खराब रह सकता है। लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आपदा की इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और इससे निपटने के लिए राज्य को और अधिक तैयार रहने की जरूरत है।
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