मुरासोली ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और एनआर एलंगो ने अदालत को बताया कि वे आगे मुकदमा नहीं चलाएंगे। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने भाजपा नेता की अपील स्वीकार करते हुए मानहानि की कार्यवाही रद्द कर दी ।फैसला सुनाने से पहले, न्यायालय ने मुरासोली ट्रस्ट की उदारता की सराहना की।
यह आदेश मुरुगन द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।
मामला दिसंबर 2020 का है, जब चेन्नई स्थित मुरासोली ट्रस्ट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुरुगन के कथित मानहानिकारक बयानों के लिए शिकायत दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में मुरुगन के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई और सितंबर 2023 में उनकी याचिका पर सुनवाई का निर्णय लिया। यह मामला चेन्नई की एक विशेष अदालत में विचाराधीन था। शिकायत दर्ज होने के बाद मुरुगन ने मद्रास उच्च न्यायालय में मामले को रद्द करने की मांग की। हालांकि, उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद वे सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे।
मुरुगन ने मद्रास उच्च न्यायालय के 5 सितंबर, 2023 के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया गया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि मुरुगन को निचली अदालत में अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता है, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।
ट्रस्ट का आरोप था कि मुरुगन ने जनता की नजरों में मुरासोली ट्रस्ट की छवि को धूमिल करने के इरादे से बयान दिए थे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल शिकायत में लगे आरोपों के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध की जांच कर सकती है, न कि मामले के विस्तृत तथ्यों की न्यायालय ने यह भी कहा कि मानहानिकारक बयानों का मूल्यांकन एक सामान्य विवेकशील व्यक्ति के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।





