मध्यप्रदेश में बीते दो दिनों से दलितों के शोषण का यह दूसरा संगीन मामला सामने आया है। इससे पहले कटनी जीआरपी थाने में दलित समाज की बुजुर्ग महिला और उसके नाबालिग पोते की पुलिस द्वारा बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया था। हालांकि, घटना क़रीबन 10 महीने पुरानी है, लेकिन कमलनाथ के पोस्ट करने से पहले मामला पूरी तरह से दबा हुआ था। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घटना का वीडियो पोस्ट कर बीजेपी सरकार को सख़्त कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया । इधर, म.प्र. कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पीड़ित परिवार के साथ कटनी थाने जाकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की माँग करते हुए आमरण अनशन का ऐलान कर दिया था। पटवारी और कांग्रेस का रूख देखकर सरकार को छह आरोपी पुलिस वालों पर कार्रवाई कर उन्हें सस्पेंड करने पर मज़बूर होना पड़ा। सस्पेंशन लेटर देखने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अपना अनशन समाप्त किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वह यहीं रुकने वाले नहीं है, वह कोर्ट जाएंगे और दोषियों को सख़्त से सख़्त सजा दिलाने के लिए अपील करेंगे।
पटवारी ने राज्य की सरकारी मशीनरी को और पुलिस को चेताया कि वह बीजेपी का कार्यकर्ता बनकर काम न करे। अगर कोई ऐसा करता है तो कांग्रेस ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों को छोड़ेगी नहीं।
कमलनाथ ने वीडियो पोस्ट कर क्या कहा
कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में दलितों और आदिवासियों पर बढ़ रहे अत्यचार और सरकारी मशीनरी का हाथ होने पर बीजेपी को सवालों के कठघरे में खड़ा किया। कमलनाथ ने कहा कि दलित-आदिवासियों की पैरोकार बनने वाली भारतीय जनता पार्टी का दलितों की तरफ़ ध्यान ही नहीं है। प्रदेश में दलितों पर अत्याचार की घटनायें बढ़ रही हैं। गौर करने वाली बात है कि पूर्व मुख्यमंत्री के एक ट्ववीट ने मध्यप्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी थी।





