दिल्ली चुनाव से क्या सीख रही टीएमसी?
दिल्ली चुनावों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला। कई सीटों पर कांग्रेस को इतने वोट मिले कि अगर ये वोट आप के साथ जुड़ते, तो बीजेपी को सत्ता से बाहर किया जा सकता था। इस नतीजे ने विपक्षी गठबंधन INDIA Bloc की चुनावी रणनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बंगाल में कांग्रेस के बिना भी जीतने में सक्षम है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी की प्राथमिकता विपक्षी एकता है, लेकिन अगर कांग्रेस सहयोग नहीं करती, तो टीएमसी अकेले चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
क्या बंगाल में दोहराया जाएगा दिल्ली मॉडल?
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "ममता बनर्जी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हम बंगाल में अकेले लड़ेंगे। इसमें कोई नई बात नहीं है। हमने 2014, 2016, 2019 और 2024 में अकेले चुनाव लड़ा और हर बार जीत हासिल की। हम फिर से वही प्रदर्शन दोहराने जा रहे हैं।"
इससे पहले, सोमवार को ममता बनर्जी ने विधायकों से कहा कि कांग्रेस बंगाल में इतनी मजबूत नहीं है कि वह टीएमसी की जीत में बाधा डाल सके। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस ने वोट कटवा की भूमिका निभाई, जिससे आम आदमी पार्टी को नुकसान हुआ, लेकिन बंगाल में ऐसा संभव नहीं होगा।
ममता बनर्जी ने दावा किया, "हम 2026 का चुनाव अकेले लड़ेंगे और दो-तिहाई बहुमत से जीत दर्ज करेंगे। हमारे मतदाता हमारे साथ हैं और यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि वोट बंटने से हमें नुकसान हो।"
बंगाल में बीजेपी और कांग्रेस की स्थिति
टीएमसी भले ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिख रही हो, लेकिन बीजेपी लगातार बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2021 के चुनाव में पार्टी ने बड़ी बढ़त दर्ज की थी और इस बार वह इसे और आगे बढ़ाने के प्रयास में है। वहीं, कांग्रेस को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अगर वह टीएमसी के साथ गठबंधन नहीं करती, तो दिल्ली की तरह बंगाल में भी विपक्षी वोटों के बंटने का खतरा रहेगा, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
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