सीजेआई गवई ने मौखिक टिप्पणी में कहा, "ऐसे पद पर आसीन व्यक्ति से जिम्मेदारी भरे वक्तव्यों की अपेक्षा की जाती है। मंत्री के हर शब्द में अनुशासन और विवेक झलकना चाहिए।" पीठ को अवगत कराया गया कि मंत्री के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है। अधिवक्ता मखीजा ने दलील दी कि मंत्री शाह ने अपने बयान पर माफी मांग ली है और मीडिया ने उनके बयान को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया है, जिससे गलतफहमी पैदा हुई।
हालांकि, कोर्ट ने इस आधार पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। मंत्री की ओर से की गई यह मांग कि जब तक सुनवाई पूरी न हो, तब तक कोई कठोर कार्रवाई न की जाए, कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके बजाय पीठ ने उन्हें उच्च न्यायालय में राहत के लिए आवेदन करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा, "उच्च न्यायालय जाइए, हम कल इस मामले पर सुनवाई करेंगे।" गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय इस मामले में स्वत: संज्ञान के तहत सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया। अब इस याचिका पर सुनवाई गुरुवार को जारी रहेगी।
मध्य प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह की विवादित टिप्पणी के बाद उनका राजनीतिक भविष्य अधर में नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर बुधवार देर रात एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी मौजूद रहे। बैठक में मंत्री शाह के इस्तीफे को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ, हालांकि सूत्रों के मुताबिक, इस्तीफे पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।





