किसानों, महिलाओं और व्यापारियों के लिए निराशाजनक बजट
बजट की आलोचना करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह किसानों की उम्मीदों को ध्वस्त कर देगा। उन्होंने दावा किया कि इससे महिलाओं की आर्थिक परेशानियां बढ़ेंगी, बेरोजगारों के लिए कोई राहत नहीं मिलेगी और व्यापारियों व दुकानदारों पर मंदी की मार और गहरी होगी। उन्होंने भाजपा विधायकों और मंत्रियों पर तंज कसते हुए कहा कि सदन में मेजें पीटने वाले नेता अब अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के आक्रोश का सामना करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा, "महंगाई और बेरोजगारी पर जनता सवाल पूछेगी, लेकिन भाजपा के नेता इसका कोई जवाब नहीं दे पाएंगे।"
सरकार का कोई ठोस रोडमैप नहीं
अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट पूरी तरह से दिशाहीन है और सरकार के पास राज्य को आगे ले जाने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई बजटों की तरह इस बार भी बजट और भाजपा के घोषणा पत्र के बीच कोई तालमेल नहीं दिखता। उनके मुताबिक, सरकार को यह तक नहीं पता कि वह उत्तर प्रदेश को किस दिशा में ले जाना चाहती है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "हर साल सरकार कहती है कि यह यूपी का सबसे बड़ा बजट है। लेकिन यह स्वाभाविक है कि हर नया बजट पिछले बजट से बड़ा ही होगा। यह कहना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है।"
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8,08,736 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट बताया जा रहा है। यह 2024-25 के बजट से 9.8 प्रतिशत अधिक है और इसमें 28,478.34 करोड़ रुपये की नई योजनाएं शामिल की गई हैं। हालांकि, अखिलेश यादव ने इस बजट को सिर्फ आंकड़ों का खेल बताते हुए कहा कि इसमें जनता के लिए कोई ठोस राहत नहीं दी गई है।
उन्होंने सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा, "अंग्रेजी में एक कहावत है- 'साइलेंस इज गोल्ड' यानी चुप्पी सबसे बड़ी ताकत होती है। संस्कृत में भी इसका मिलता-जुलता अर्थ है कि विद्वानों की सभा में मूर्ख के लिए मौन ही सबसे बड़ा आभूषण होता है।" उनके इस बयान को भाजपा सरकार पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
जनता के असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश
अखिलेश यादव ने सरकार पर जनता के असली मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बजट महज दिखावे के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें न तो किसानों के लिए कोई ठोस प्रावधान है, न ही महंगाई और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान की कोई रणनीति बनाई गई है। उन्होंने इसे 'जुमला बजट' करार देते हुए कहा कि जनता अब सरकार के खोखले दावों को समझ चुकी है और जल्द ही इसका जवाब देगी।





