उन्होंने बताया कि नए कानूनों के तहत जिन मामलों में सजा की अवधि सात वर्ष या उससे अधिक है, उनमें फोरेंसिक विशेषज्ञों का घटनास्थल पर जाकर जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत सभी राज्यों में समयबद्ध तरीके से फोरेंसिक सुविधाओं के विकास का प्रावधान किया गया है। इन बदलावों से अपराध जांच की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और सटीक होगी, जिससे दोषसिद्धि दर में सुधार आएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने एनएफएसयू से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वित्तीय कारणों से कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से कमजोर और वंचित समुदायों को न्याय दिलाने में फोरेंसिक विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की बढ़ती भूमिका
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल तकनीक और कृत्रिम मेधा (AI) के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के कारण फोरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञों की क्षमताओं में वृद्धि हो रही है, लेकिन साथ ही अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हमारी पुलिस, अभियोजन और आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े लोगों को अपराध को नियंत्रित करने और न्याय को अधिक सुलभ बनाने के लिए अपराधियों से अधिक होशियार, सतर्क और तत्पर रहना होगा।"
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एनएफएसयू का योगदान एक सशक्त फोरेंसिक प्रणाली के निर्माण में सहायक होगा, जिससे दोषसिद्धि दर में वृद्धि होगी और अपराधी अपराध करने से पहले कई बार सोचने को मजबूर होंगे।
इस कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी उपस्थित रहे। समारोह में एनएफएसयू के कुलपति जे.एम. व्यास की अध्यक्षता में 1560 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।
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